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March 27, 2026 4:29 am

चंबल परियोजना के लिए 636 करोड़ के कार्यादेश जारी : 2021-2022 गहलोत सरकार में हुई थी स्वीकृत, 50 वर्षों तक पेयजल संकट होगा दूर: जाड़ावत

चित्तौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र के पेयजल समाधान के लिए राजस्थान की पूर्व अशोक गहलोत सरकार में पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत के प्रयासों से स्वीकृत चंबल परियोजना धरातल पर उतरने जा रही है जिसके लिए 648 की करोड़ की लागत वाली इस योजना में एलएनटी कंपनी को 636 करोड़ रुपए की राशि में कार्यादेश जारी हो गया है। यह कंपनी वर्तमान में बेगू, भैंसरोड़गढ़ चम्बल परियोजना का कार्य भी कर रही है। पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत ने बताया कि कांग्रेस सरकार में भीलवाड़ा के सहाड़ा में प्रभारी के तौर पर गांव-गांव में चुनावी दौरे के दौरान वहां पानी का क्राइसिस देखा, उसी वक्त चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र के लिए पानी के संकट को दूर करने के लिए उस समय के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से चम्बल परियोजना की मंजूरी 2021-2022 में ही करवा दी थी एवं निरन्तर तात्कालीन मुख्य अभियंता पीएचडी लुहाड़िया एवं दिनेश गोयल एवं अन्य अधिकारियों के संपर्क में रहकर इस योजना को मूर्तरूप देने के प्रयास में लगा रहा। सरकार बदलने के बाद भी योजना को लेकर अधिकारियों से बराबर संपर्क में रहा एवं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस योजना के लिए बार-बार फीडबैक लेते रहते थे। इस योजना की मंजूरी के लिए चित्तौड़गढ़ की जनता को उनका आभार आखिरकार छह बार टेंडर होने के बाद इस योजना के लिए कार्यादेश जारी हो गए। पूर्व में बार-बार उच्च बीड की वजह से कार्यादेश निरस्त हो जाते थे एवं नेगोसिएशन भी सफल नहीं हुए थे। आखिरकार एल एन टी कंपनी को कार्यादेश जारी होने से बहुप्रतीक्षित यह योजना शीघ्र घर घर पहुंचेगी जो कि जनता जल मिशन योजना के अंतर्गत ही मूर्तरूप लेंगी। पूर्व राज्यमंत्री ने कहा कि चम्बल परियोजना से चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र के 278 गांव, ढाणी, मजरे, एवं चित्तौड़गढ़ शहर के साथ निंबाहेड़ा के 66 गांव भी शामिल है। बस्सी क्षेत्र में उच्च जलाशय बनेगा जिसमें राजगढ़ से पानी की कनेक्टिविटी मिलेगी इस जलाशय से घाटा क्षेत्र, एवं बस्सी के आस पास के गांवों को पानी की आपूर्ति होगी, सबसे बड़ा उच्च जलाशय सेमलपुरा में बनेगा जिससे चित्तौड़गढ़ शहर एवं ग्रामीण में जलापूर्ति होगी। कन्नौज के जलाशय से भदेसर क्षेत्र की पंचायतों को पांडोली के जलाशय से आसपास के ग्राम पंचायत में जलापूर्ति होगी। इस परियोजना से प्रत्येक ग्राम पंचायत में 18 से 20 करोड़ एवं बस्सी एवं सावा जैसी बड़ी ग्राम पंचायत में 30 से 50 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस परियोजना के मूर्त रूप लेते ही आगामी 50 वर्षों तक की पेयजल समस्या का समाधान होगा।

डेस्क/माय सर्कल न्यूज
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज

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