बेगूं। उपखंड बेगूं के काटूंदा पीएम श्री महात्मा गाँधी विद्यालय में कृषि विभाग द्वारा मृदा स्वास्थ्य संवर्धन एवं जैविक खेती हेतु एक विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। आपणो खेत – आपणी खाद अभियान के तहत इस कार्यक्रम में भावी पीढ़ी को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने एवं जैविक खेती अपनाने के वैज्ञानिक तरीकों से अवगत कराया गया।
संतुलित उर्वरक उपयोग पर जोर
कृषि विभाग की इस पहल का मुख्य उद्देश्य मिट्टी की सेहत में सुधार करना और किसानों को अंधाधुंध रासायनिक खादों के प्रयोग से बचाकर संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन की ओर ले जाना है। शिविर में विद्यालय के कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
विशेषज्ञों ने साझा किए तकनीकी सूत्र
बैठक में सहायक कृषि अधिकारी हंसराज धाकड़ एवं कृषि पर्यवेक्षक सोनू कुमार मीणा ने कार्बनिक खादों के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों ने मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं पर प्रकाश डाला
मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card): कार्ड की उपयोगिता बताते हुए इसके आधार पर ही खाद डालने की सलाह दी गई।
जैविक खाद का महत्व: रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में जैविक खाद और केंचुआ खाद (Vermicompost) के लाभ बताए गए।
पोषक तत्व प्रबंधन: मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के संतुलित उपयोग की तकनीक साझा की गई।
लागत में कमी और उपजाऊ शक्ति में वृद्धि
विभाग का मानना है कि यदि किसान अपनी खाद (जैविक व केंचुआ खाद) का स्वयं उत्पादन और प्रयोग करेंगे, तो न केवल खेती की लागत कम होगी, बल्कि भूमि की उपजाऊ शक्ति भी लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी। विद्यार्थियों के माध्यम से इस संदेश को घर-घर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रशासन
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