चित्तौड़गढ़, माय सर्कल न्यूज, सलमान। राजस्थान में जहां सूरज के तीखे तेवर शुरू होते ही अमूमन पेयजल किल्लत की सुर्खियां डराने लगती हैं, वहीं इस बार चित्तौड़गढ़ से राहत भरी खबर है। पिछले मानसून की मेहरबानी का नतीजा है कि इस साल जिले में टैंकरों की मांग पिछले साल के मुकाबले महज 5 फीसदी रह गई है। हालांकि, विभाग के सामने अब पानी की उपलब्धता से ज्यादा उसकी शुद्धता एक बड़ी तकनीकी चुनौती बनकर उभरी है। पिछले साल हुई औसत से 8 फीसदी अधिक बारिश ने जिले के जलाशयों को संजीवनी दी है। आंकड़ों की तुलना करें तो राहत की तस्वीर साफ नजर आती है। पिछले साल अप्रैल-मई में जहां 308 गांवों और 68 ढाणियों में टैंकर दौड़ रहे थे, वहीं इस बार यह संख्या सिमटकर सिर्फ 15 गांवों तक रह गई है। जलदाय विभाग के पास मानसून आने तक यानी अगले दो-ढाई महीनों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
◆शहर की प्यास: गणित और स्रोत

◆ बड़ी चुनौती: फिल्टर बेड में ‘एल्गी’ बनी सिरदर्द
भले ही पानी पर्याप्त हो, लेकिन उसकी रंगत ने कई उपभोक्ताओं में संशय पैदा कर दिया है। चित्तौड़गढ़ जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता सुनील कुमार गुप्ता ने बताया कि उदयपुर की ओर से बहने वाली बेड़च नदी के साथ एल्गी यानी कांजी बहकर घोसुण्डा बांध में आई है। जिसके कारण घोसुण्डा डेम से सेगवा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक आ रहे पानी में भी एल्गी आ रही हैं। यह कांजी सेगवा स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के फिल्टर बेड के लिए बड़ी मुसीबत बन रही है। यहां विशेष सावधानी बरती जा रही हैं।

◆ क्यों आ रहा है नलों में मटमैला पानी..?
जलदाय विभाग के अनुसार, चित्तौड़गढ़ शहर के सेगवा स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में पानी को कीटाणुरहित करने के लिए इसमें ब्लीचिंग पाउडर और एलम यानी फिटकरी का उपयोग किया जा रहा है। कांजी की मौजूदगी और इन रसायनों की प्रतिक्रिया के कारण पानी में हल्का पीलापन या मटमैलापन दिख रहा है। पानी की रंगत बदली है, लेकिन यह पूरी तरह सुरक्षित और पीने योग्य है। इसे कई चरणों में फिल्टर करने के बाद ही सप्लाई किया जा रहा है। जहां सेगवा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का पानी सप्लाई हो रहा हैं वहां कही-कही मटमैला पानी की शिकायतें विभाग को मिल रही हैं लेकिन यह पानी पूरी तरह सुरक्षित बताया गया हैं।
◆ यहाँ चल रहे हैं टैंकर:

रावतभाटा में पाइपलाइन के अभाव में आदर्श नगर, नया बाजार सहित 5 गांवों में टैंकरों से पेयजल आपूर्ति की जा रही हैं। इसके अलावा डूंगला के 02 गांव, कपासन पंचायत समिति क्षेत्र के सिंहपुर गांव समेत जिले के 15 गांवों में पानी की सप्लाई टैंकरों से की जा रही हैं।
चित्तौड़गढ़ में इस बार जल संकट तो नहीं है, लेकिन जल शुद्धिकरण विभाग के लिए एक बड़ी परीक्षा बना हुआ है। मटमैले पानी को देखकर जनता में जो संशय है, उसे दूर करने के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। जलदाय विभाग का कहना है कि लोग घबराएं नहीं, क्योंकि पानी की रंगत भले ही थोड़ी बदली हो, लेकिन इसकी शुद्धता मानकों पर खरी है।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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