नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर भारी इजाफा हुआ है, जिससे आम जनता की जेब पर बोझ बढ़ना तय है। तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दामों में ₹3.14 और डीजल में ₹3.11 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है।
क्यों बढ़े दाम?
ईंधन की कीमतों में इस भारी उछाल के पीछे मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को माना जा रहा है। वैश्विक उथल-पुथल के कारण कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में आग लगी हुई है।
- 126 डॉलर पहुंचा क्रूड: कुछ समय पहले तक जो कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, वह अब उछलकर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।
- कंपनियों को भारी घाटा: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमतों के कारण भारत की सरकारी तेल कंपनियों को हर दिन करीब एक हजार करोड़ रुपये (महीने में 30 हजार करोड़) का भारी नुकसान हो रहा था।
◆ रुपये में ऐतिहासिक गिरावट
ईंधन संकट के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए रुपये की गिरती कीमत भी चिंता का विषय बनी हुई है। वर्तमान में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर से नीचे चला गया है, जिससे आयात और भी महंगा हो गया है।
◆ प्रधानमंत्री की ‘मितव्ययिता’ की अपील
संकट की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते रविवार को देशवासियों से विशेष अपील की थी। उन्होंने देश की विदेशी मुद्रा को बचाने के लिए कुछ कड़े कदम उठाने का सुझाव दिया।
- ईंधन का विवेकपूर्ण उपयोग: अनावश्यक यात्राओं से बचने की सलाह।
- सोने की खरीद पर रोक: विदेशी मुद्रा भंडार को संतुलित करने के लिए सोने की खरीद कम करने की अपील।
- विदेश यात्रा: गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं को कुछ समय के लिए स्थगित करने का सुझाव।
आम आदमी पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल की कीमतों में वृद्धि से माल ढुलाई महंगी होगी, जिसका सीधा असर सब्जियों, अनाज और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे आने वाले दिनों में खुदरा महंगाई दर में और बढ़ोतरी होने की आशंका है।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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