
निम्बाहेड़ा। निम्बाहेड़ा में धोखाधड़ी और जालसाजी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहाँ एक ई-मित्र संचालक ने इंसानियत और भरोसे को ताक पर रख दिया। आरोप है कि ई-मित्र संचालक ने अपने भाई के साथ मिलकर एक बुजुर्ग और अशिक्षित महिला की बीमारी का फायदा उठाया और उनके खाते से करीब 7 लाख रुपये साफ कर दिए। इस मामले में अब कोर्ट के आदेश के बाद कोतवाली थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यह हैरान करने वाला मामला निम्बाहेड़ा का है। पुलिस के अनुसार, कर्मचारी कॉलोनी के रहने वाले अन्नू खां (पुत्र बशीर खां भिश्ती) ने इस्तगासे (कोर्ट के माध्यम से) के जरिए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। अन्नू खां ने अपनी शिकायत में बताया कि उनकी बुजुर्ग और अशिक्षित मां, साईदा बेगम का बैंक ऑफ बड़ौदा की निम्बाहेड़ा शाखा में करीब 10 लाख रुपये जमा थे। इसके साथ ही उनकी 2 लाख रुपये की एक एफडी (FD) भी थी। आरोप है कि उनके परिचित ई-मित्र संचालक मोहम्मद यासीन मंसूरी और उसके भाई मोहम्मद यामिन मंसूरी (निवासी रजा कॉलोनी) ने एक सोची-समझी साजिश रची। उन्होंने साईदा बेगम की बीमारी और उनके पढ़े-लिखे न होने का फायदा उठाया। आरोपियों ने सबसे पहले इक्विटास बैंक में महिला का एक नया खाता खुलवाया। इसके बाद 29 मई 2025 से लगातार छल-कपट करते हुए साईदा बेगम के खाते से करीब 7 लाख रुपये पार कर दिए। जब पीड़ित परिवार को इस बड़ी धोखाधड़ी की भनक लगी, तो उन्होंने आरोपियों को घेरा। खुद को फंसता देख आरोपियों ने 25 फरवरी 2026 को मामले को रफा-दफा करने के लिए 7 लाख रुपये का आईसीआईसीआई बैंक का एक चेक थमा दिया। लेकिन जब पीड़ित पक्ष ने 17 मार्च 2026 को इस चेक को बैंक में लगाया, तो वह रेफर टू ड्रॉवर (Refer to Drawer) की टिप्पणी के साथ बाउंस हो गया। इसके बाद से आरोपी लगातार पैसे देने में टालमटोल करते रहे। आरोपियों की टालमटोल और धोखे से तंग आकर आखिरकार पीड़ित परिवार ने कोर्ट की शरण ली।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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