
चित्तौड़गढ़, माय सर्कल न्यूज। नगर परिषद क्षेत्र में जरूरतमंदों को मात्र 8 रुपये में भोजन उपलब्ध कराने वाली अन्नपूर्णा रसोई योजनाओं पर बीते दो दिनों से संकट के बादल मंडरा रहे थे। पिछले तीन महीनों से बकाया भुगतान न मिलने के कारण संचालकों ने शहर की 6 अन्नपूर्णा रसोइयों पर ताले लटका दिए। इन रसोई से रोजाना करीब एक हजार जरूरतमंद लोग खाना खाते हैं। हालांकि मामला बढ़ता देख नगर परिषद प्रशासन हरकत में आया और वार्ता के बाद संचालन फिर से शुरू करवाया गया। राजस्थान सरकार की योजना के तहत चित्तौड़गढ़ नगर परिषद क्षेत्र की 6 अन्नपूर्णा रसोइयों का संचालन मेवाड़ विकलांग सेवा संस्थान द्वारा किया जा रहा है। संस्थान का आरोप है कि पिछले 3 महीनों से उन्हें शासन से भुगतान नहीं मिला है। बजट के अभाव में रसोई के लिए राशन सामग्री का बाजार में भारी उधार हो गया, वहीं संस्थान में कार्यरत 26 कर्मचारियों का वेतन भी अटक गया। आर्थिक तंगी से परेशान होकर संचालकों ने रसोइयों को बंद करने का फैसला लिया, जिससे लगातार दूसरे दिन जरूरतमंद लोग भोजन के लिए परेशान होते रहे।
रसोई संचालक नीरज कुमार लड्ढा ने बताया कि भुगतान के अभाव में अन्नपूर्णा रसोई बंद की हैं। नगर परिषद को पहले भी भुगतान को लेकर अवगत कराया गया था, लेकिन समय पर भुगतान जारी नहीं हो सका। पिछले 3 माह का करीब 15 लाख रुपए का भुगतान अटका हुआ हैं। कर्मचारियों का वेतन और राशन का उधार बहुत बढ़ चुका था।
इधर रविन्द्र यादव ने बताया कि भुगतान में कुछ देरी हो गई थी। रसोई संचालकों को बुलाकर चर्चा की गई है और समस्या का समाधान निकालते हुए शहर की सभी 6 रसोइयों का संचालन पुनः शुरू करवा दिया गया है। आयुक्त यादव ने कहा कि नगर परिषद क्षेत्र के 6 रसोई का निरीक्षण भी किया जाएगा।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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