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July 17, 2026 8:11 am

साँवलिया सेठ मंदिर: यहाँ करोड़ों के चढ़ावे का पाई-पाई का हिसाब, कॉर्पोरेट जैसी पारदर्शी व्यवस्था बनी मिसाल

चित्तौड़गढ़, माय सर्कल न्यूज। अक्सर कुछ मंदिरों में चढ़ावे को लेकर विवाद और चोरी की खबरें सुर्खियों में रहती हैं। लेकिन देश में एक ऐसा मंदिर भी है, जहाँ करोड़ों का चढ़ावा आता है, लेकिन गड़बड़ी की गुंजाइश शून्य है। यह मंदिर है राजस्थान के मेवाड़ का प्रसिद्ध कृष्ण धाम श्री साँवलिया सेठ मन्दिर…यहाँ की व्यवस्था किसी कॉर्पोरेट हाउस से कम नहीं है।
श्री साँवलिया सेठ का मंदिर अपनी चमत्कारी शक्तियों के साथ-साथ अपनी पारदर्शिता के लिए भी पूरे देश में मिसाल बना हुआ है। इस मंदिर में हर महीने औसतन 30 से 40 करोड़ रुपए का चढ़ावा आता हैं। इतनी बड़ी धनराशि का हिसाब रखने के लिए यहाँ सुरक्षा और निगरानी का अभेद्य चक्रव्यूह तैयार किया गया है। मंदिर के दानपात्र, भेंटकक्ष और कार्यालय हर जगह तीसरी आंख यानी सीसीटीवी कैमरों का पहरा रहता है। व्यवस्था इतनी चुस्त है कि यदि कोई श्रद्धालु भेंटकक्ष में राशि देता है, तो उसे तुरंत रसीद दी जाती है। सबसे दिलचस्प पहलू है दानपेटी खुलने की प्रक्रिया… साल में 11 बार खुलने वाले इन दानपात्रों से लेकर नोटों की गिनती तक, सब कुछ सीसीटीवी की निगरानी में होता है।
सुरक्षा में चूक की कोई जगह नहीं है। नोट गणना स्थल पर काम करने वाले हर कर्मचारी की प्रवेश और निकास के समय कड़ी तलाशी ली जाती है। मन्दिर मण्डल अधयक्ष हजारी दास वैष्णव ने बताया कि साँवलिया सेठ मंदिर प्रशासन इस राशि का पाई-पाई हिसाब रखता है। भक्तों का चढ़ावा केवल तिजोरी भरने के लिए नहीं, बल्कि समाज सेवा और विकास के लिए समर्पित है। वर्तमान में यहाँ करीब 100 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इसमें मंदिर परिसर को भव्य बनाना, श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन की व्यवस्था और आसपास के 16 गांवों का विकास शामिल है। उन्होंने कहा कि यहां चढ़ावें की पारदर्शिता इतनी हैं कि भेंटकक्ष, कार्यालय और दानपेटी तक सीसीटीवी की निगरानी में हैं। दानपात्र खोलने के दौरान भी मेन्युअल और सीसीटीवी से विशेष निगरानी रखी जाती हैं। श्री साँवलिया सेठ के मण्डफिया स्थित 5 बैंकों में खाते हैं। सत्संग हॉल में दानराशि गणना के बाद मण्डफिया के पांच बैंकों के कार्मिक मन्दिर आते हैं और यही से राशि गिनकर और खाते में जमा कर उसकी रसीद मन्दिर मण्डल को देकर ले जाते हैं। श्रद्धालुओं की आस्था को सम्मान देने और उनके द्वारा दिए गए दान का सही उपयोग करने के मामले में श्री साँवलिया सेठ मंदिर पूरे देश के लिए एक रोल मॉडल है। यहाँ न केवल साक्षात प्रभु का वास है, बल्कि भक्त और भगवान के बीच के इस रिश्ते में पारदर्शिता की पवित्रता भी बरकरार है।

डेस्क/माय सर्कल न्यूज
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज

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