
चित्तौड़गढ़। निकाय चुनाव के नामांकन के अंतिम दिन राजनीतिक गलियारों में भारी उठापटक और नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। टिकट वितरण के आखिरी पलों में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दलों ने अपने अधिकृत प्रत्याशियों की सूची में बड़े बदलाव किए हैं, जिससे नाराज कार्यकर्ताओं में असंतोष की लहर है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष और पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह जाड़ावत गुट के बीच एकजुटता का संदेश महज दिखावा साबित हुआ। प्रदेश से आए प्रभारी और जिलाध्यक्ष प्रमोद सिसोदिया द्वारा सूची में किए गए फेरबदल से गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। वार्ड 50 मजबूत दावेदार रणजीत लोट का टिकट काटकर वासू को प्रत्याशी बनाया गया।
वार्ड 25 प्रचार में जुटे आशीष आगल की जगह अभिषेक नलवाया को अधिकृत किया गया। वार्ड 31 चुनाव प्रचार शुरू कर चुके आशीष त्रिवेदी का नाम बदलकर दिनेश चन्द्र गुर्जर को टिकट सौंपा गया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसे कुल्हाड़ी पर पैर मारना बताया है। आरोप हैं कि वार्ड 25 से बीजेपी प्रत्याशी शैलेंद्र झंवर और वार्ड 31 से सुदर्शन रामपुरिया को फायदा पहुँचाने के लिए अंतिम समय में यह मिलीभगत की गई है।
◆ भारतीय जनता पार्टी में भी अंतिम क्षणों में जमकर सियासी दांव-पेच चले
वार्ड 11 भोलाराम प्रजापत की जगह सुबह राजकुमार तम्बोलिया का नाम आने से भोलाराम आहत हो गए और चुनाव लड़ने से मना कर दिया। बाद में पार्टी को फैसला बदलते हुए पुनः भोलाराम को ही वार्ड 11 से टिकट देना पड़ा।
वार्ड 20 चर्चा में चल रहे अर्जुन गिल का पत्ता साफ कर कपिल मालानी को चुनावी मैदान में उतारा गया। दोनों दलों की अंतर्कलह के बीच दर्जनों वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी चुनौती बनकर उभरे हैं। वार्ड 47 से अमानत अली व राकेश सिंघवी, वार्ड 33 से चंदा तेली, वार्ड 43 से गोविंद कंवर, वार्ड 51 से माया दाधीच, वार्ड 25 से स्वरूप सिंह चुंडावत और वार्ड 18 से मुकेश व अंकुल आदिवल जैसे कई प्रत्याशी मैदान में डटे हैं। ये निर्दलीय उम्मीदवार अब राजनीतिक दलों के समीकरण बिगाड़ने के लिए तैयार हैं। ऐन वक्त पर हुए इन बदलावों और अंदरूनी खींचतान का चुनाव परिणामों पर क्या असर पड़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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