
चित्तौड़गढ़। नगर परिषद चुनाव के नामांकन पत्रों की जांच के दौरान अचानक माहौल गरमा गया। वार्ड संख्या 34 से कांग्रेस प्रत्याशी द्वारा भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ दर्ज कराई गई आपत्ति को रिटर्निंग अधिकारी ने खारिज कर दिया। इसके बाद कांग्रेस ने प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया और मामले की शिकायत राज्य निर्वाचन आयोग से की है। नगर परिषद क्षेत्र के 60 वार्डों के लिए दाखिल नामांकन पत्रों की जांच के दौरान वार्ड 34 का मामला विवादों में आ गया। कांग्रेस प्रत्याशी शांतिलाल भील ने अपने वकीलों के साथ भाजपा प्रत्याशी रमेश चंद्र मीणा के नामांकन पर लिखित आपत्ति जताई। आपत्ति में आरोप लगाया गया कि भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ आईपीसी की धारा 365 के तहत अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-एक की अदालत में गंभीर आपराधिक मामला विचाराधीन है, जिसमें 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। कांग्रेस का आरोप है कि रिटर्निंग अधिकारी राजलक्ष्मी गहलोत ने ठोस दस्तावेजों और तथ्यों को नजरअंदाज करते हुए आपत्ति को निरस्त कर दिया। इस फैसले के आते ही मौके पर मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए और परिसर में जमकर विरोध-प्रदर्शन किया। पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह जाड़ावत ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी अपनी संभावित हार से बौखला गई है और प्रशासनिक सत्ता का खुला दुरुपयोग कर रही है। चित्तौड़गढ़ के वार्ड 34 में भाजपा उम्मीदवार के विरुद्ध 7 साल की सजा वाले गंभीर मामले के साक्ष्य देने के बावजूद प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया और एकतरफा फैसला सुनाया। हमने रिटर्निंग अधिकारी के इस पक्षपातपूर्ण रवैये की शिकायत राज्य चुनाव आयोग और जिला निर्वाचन अधिकारी से दर्ज करवाई है। नामांकन जांच के दौरान हुई इस खींचतान ने चित्तौड़गढ़ का राजनीतिक पारा चढ़ा दिया है।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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