कपासन। प्रख्यात सूफी संत हज़रत दीवाना शाह साहब र.अ. की दरगाह शरीफ पर मंगलवार को जमादिल आखिर की चाँदरात पर आशिके दीवाना उमड़ पड़े।
आहता ए नूर में महफिले मिलाद एवं कव्वाल हज़रात ने बारी-बारी से अपने कलाम पेश किए। मेला ग्राउण्ड मे 300 से उपर अस्थाई कपड़ों, मनिहारी, खिलोने की दुकानें लगी। दुकानों पर खरीदारों की भारी भीड़ लगी रही।
दरगाह वक्फ कमेटी के सैक्रेट्री मोहम्मद यासीन खाँ अशरफी के अनुसार जमादिल आखिर की चाँद रात पर मंगलवार प्रातः काल से ही आशिके दीवाना व जायरीने दीवाना की आवक शुरू हो गई। आस्ताना ए आलिया के मुख्य मज़ार पर फूल, ईत्र, चादर पेश करने के लिए बुलन्द दरवाजा तक लम्बी-लम्बी कतारें लगी। आहता ए नूर में महफिले मिलाद एवं कव्वाल हज़रात ने बारी-बारी से अपने कलाम पेश किए। मेला ग्राउण्ड मे 300 से उपर अस्थाई कपड़ों, मनिहारी, खिलोने की दुकानें लगी। दुकानों पर खरीदारो की भारी-भीड़ लगी रही। मिन्नत के धागे बाँधने व मिन्नत उतारने के लिए अपने बच्चों को गुड, खोपरा, सुखा मेवा, फल-फ्रुट से तोलने का सिलसिला दिनभर चलता रहा। फूल वालों की दुकानों पर फूल, चादर, ईत्र खरीदने वालो की भीड़ रही। सांयकाल चाँद दिखाई देने से पूर्व चिराग, बत्ती के समय लोबान के साथ अर्जिया पेश कर मुल्क मे अमनो सुकून व जायरीने दीवाना की हर परेशानी दूर करने के लिए दुआ की गई तो पूरा दरगाह परिसर आमीन-आमीन की सदाओं से गूंज उठा। चाँद देखते ही लोग एक-दूसरे को गले मिलकर मुबारकबाद देते नजर आए व बाबा हुजूर के धोले गुंबद को निहारते रहे।
दरगाह वक्फ कमेटी की जानिब से सर्दी से बचाव एवं छाया-पानी का माकूल इंतजाम किया गया।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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