
भीलवाड़ा। संत निरंकारी मंडल आरजिया चौराहा स्थित रविवार को सत्संग भवन पर सद्गुरु माता सुदीक्षा महाराज की कृपा से बाल समागम का आयोजन हुआ। बाल समागम मे बच्चों व भक्त श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कानपुर (उत्तर प्रदेश) से आए प्रचारक संत संतोष गुप्ता ने कहा कि निरंकार को अपनी जिंदगी का आधार बनाकर जीवन जीना चाहिए। जिसके जीवन में निरंकार नहीं है उसका कोई आधार नहीं है। निरंकार को अपने जीवन के कार्यों में शामिल करने से सारे कार्य आसान बन जाते हैं। आज हम इस निरंकार को भूल गए हैं हर माता-पिता चाहता है कि हमारे बच्चे संस्कारवान बने तो पहले हमें सद्गुरु के शरण में जाकर सेवा सत्संग सुमिरन से जुड़ना है। सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज कहते हैं कि पहला आधार निरंकार को ही बनकर ज्ञानवान एवं संस्कारवान बन सकते हैं सतगुरु का ज्ञान से हमरा मे-मे का अहंकार खत्म हो जाता है। जब तक हम बच्चे बनकर रहेंगे तो मस्त रहेंगे गुरु के आगे हम सभी को बच्चे बनकर ही रहना है। उम्र हमारी नहीं शरीर की होती है आत्मा की नहीं आत्मा अजर-अमर है आत्मा की कोई उम्र नहीं होती। आज बच्चे माता-पिता का आचरण को देखकर ही दुनिया वीं बातें सीखते हैं। इसलिए पहले माता-पिता को ज्ञानवान जीवन जीकर बच्चों को वैसा ही संस्कार देना चाहिए। मीडिया सहायक लादूलाल ने बताया कि भीलवाड़ा जॉन के विशाल संत समागम में नन्हे मुन्ने बच्चों ने गीत कविता, गजल, नाट्य, तथा अपने विचारों की प्रस्तुतियां दी एवं सद्गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया। नन्हे बच्चों की कला व प्रस्तुति देखकर भक्त श्रद्धालु भाव विभोर हो गए एवं करतल ध्वनि से उनका हौसला बढ़ाया। बाल समागम में उदयपुर, चित्तौड़गढ़, गुलाबपुरा, मांडलगढ़, तथा भीलवाड़ा के आसपास के कई बच्चों ने भाग लिया। अंत में संत जगपाल सिंह ने सभी का आभार ज्ञापित किया। समागम के दौरान क्षेत्रीय संचालक हरिचरण, शिक्षक रमेश कुमार मेहरा की देखरेख में सेवादल के भाई-बहन ने सेवा कार्य में भाग लिया।


Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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