◆ विद्यार्थियों की यह हड़ताल पूर्णत: अनावश्यक और तथ्यों पर आधारित नहीं- मेवाड़ यूनिवर्सिटी
चित्तौड़गढ़। गंगरार स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों के घेरे में है। नर्सिंग कोर्स की मान्यता को लेकर चल रहा विवाद अब इतना गहरा गया है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने विरोध कर रहे 33 कश्मीरी छात्रों को सस्पेंड कर दिया है। मेवाड़ यूनिवर्सिटी में शिक्षा के मंदिर से ज्यादा अब आक्रोश की आवाजें सुनाई दे रही हैं। मामला B.Sc. नर्सिंग प्रोग्राम से जुड़ा है, जहाँ पढ़ रहे 50 से ज्यादा कश्मीरी छात्रों का भविष्य अब अंधकार में नजर आ रहा है।

छात्रों का आरोप है कि जिस कोर्स में उन्होंने साल 2022 में दाखिला लिया था, उसे न तो राजस्थान नर्सिंग काउंसिल (RNC) और न ही इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) से मान्यता मिली है।
हम 2022 बैच के छात्र हैं। मार्च 2026 में हमारी फाइनल परीक्षाएं होनी हैं, लेकिन अब तक यूनिवर्सिटी ने कोर्स की मान्यता का मसला हल नहीं किया है। बिना मान्यता के हमारी डिग्री सिर्फ रद्दी का टुकड़ा रह जाएगी। हम न तो कहीं रजिस्ट्रेशन करा पाएंगे और न ही नौकरी के लिए आवेदन कर सकेंगे।
यह विवाद नया नहीं है। साल 2024 में भी इसी मुद्दे पर जोरदार प्रदर्शन हुआ था। उस समय यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने कोर्ट में लिखित आश्वासन दिया था कि यदि 4 दिसंबर 2024 तक मान्यता नहीं मिली, तो छात्रों को किसी अन्य मान्यता प्राप्त संस्थान में शिफ्ट कर दिया जाएगा। लेकिन 2026 की शुरुआत हो चुकी है और आश्वासन अब भी केवल कागजों तक ही सीमित है। जब छात्रों ने अपने हक के लिए आवाज उठाई, तो समाधान निकालने के बजाय प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए 33 छात्रों को निलंबित कर दिया।
मुख्य बिंदु: क्या है छात्रों की मांग?
●कोर्स की तत्काल मान्यता: RNC और INC से जरूरी अप्रूवल लिया जाए। ●शिफ्टिंग की प्रक्रिया: यदि मान्यता नहीं मिलती, तो कोर्ट के आदेशानुसार छात्रों को मान्यता प्राप्त कॉलेज में ट्रांसफर किया जाए। ●निलंबन की वापसी: सस्पेंड किए गए 33 छात्रों का निलंबन तुरंत रद्द हो।

फिलहाल, छात्र संगठनों ने केंद्र सरकार और राजस्थान के मुख्यमंत्री से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। जम्मू-कश्मीर छात्र संघ ने भी चिंता जताई है कि बिना किसी ठोस कदम के इन 50 छात्रों का करियर तबाह हो सकता है। इधर इस मामले में मेवाड़ यूनिवर्सिटी ने भी प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विद्यार्थियों की यह हड़ताल पूर्णत: अनावश्यक और तथ्यों पर आधारित नहीं होना बताया हैं।

◆ इन छात्रों का किया सस्पेंड
बीएससी नर्सिंग के छात्र आदिल ऐजाज, आदिल फारूक लोन, आकिब बशीर लोन, आकिब मुश्ताक वार, अबरार अहमद सोफी, अबरार फारूक, अजहर सादिक़ राथर, बाबर सादिक, बिलाल अहमद डार, बुरहान उद्दीन, फैजान अकबर, फैजान नजीर मीर, इब्रिश भट, इशरत हुसैन, कमरान कयूम, काजिम जमाल, खुशबू अकबर, मरयम खातून, मोहद आसिफ, मोहम्मद मुदासिर भट, मोहम्मद साजिद, नादिया फारूक, रोहित मारू, रोहित रेगर, रोहित सिंह, साइबा कोसर, साकिब अहमद सोफी, साकिब राजा, शाहबाज फरीद, शेहरियार शाबान, सिरफराज हसन, तसवीर फातिमा और उबैद उल इस्लाम को सस्पेंड किया गया है। इसके अलावा जीएनएम के छात्र कमलेश गहलोत, शीतल शर्मा, लीला सालवी, कन्हैया लाल, करण गर्ग और चंचल रेगर को भी सस्पेंड किया गया है।
◆ विद्यार्थियों की यह हड़ताल पूर्णत: अनावश्यक और तथ्यों पर आधारित नहीं- कुमावत
इधर मेवाड़ विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार सी. डी. कुमावत ने अपना व्यक्त्वय जारी कर कहा है कि विद्यार्थियों की यह हड़ताल पूर्णत: अनावश्यक और तथ्यों पर आधारित नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक जानकारियाँ विद्यार्थियों को पहले ही उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022-23 में जब हमने नर्सिंग कोर्स में प्रवेश प्रारंभ किया, उस समय हमारे पास सक्षम प्राधिकारी एवं न्यायालय के आदेश उपलब्ध थे। उन्हीं आदेशों के तहत 2022-23 तथा 2023-24 में प्रवेश लिए गए। इसके पश्चात 2024-25 और 2025-26 में भी राजस्थान सरकार के निर्देशों एवं न्यायालय के आदेशों के अनुसार ही प्रवेश प्रक्रिया संपन्न की गई। जब विषय न्यायालय में प्रस्तुत हुआ, तब न्यायालय ने विश्वविद्यालय के पक्ष को सुनने के बाद आदेश दिया कि मेवाड़ विश्वविद्यालय को एनओसी प्रदान की जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि सरकार को किसी प्रकार की आपत्ति हो तो 30 दिनों के भीतर पुन: निरीक्षण कराया जाए। सरकार द्वारा निर्धारित अवधि में कोई पुन: निरीक्षण नहीं कराया गया और न ही एनओसी जारी की गई। इस प्रकार न्यायालय के आदेश के अनुसार एनओसी स्वीकृत मानी जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त वर्ष 2025 में जब सरकार द्वारा एक विज्ञप्ति जारी कर सभी नर्सिंग संस्थानों को एनओसी के लिए पुन: आवेदन करने को कहा गया तब मेवाड़ विश्वविद्यालय ने पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए आवेदन किया। इस मामले में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति जिसमें एडीएम सिटी सहित अन्य अधिकारी सम्मिलित थे ने हमारे परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सभी आवश्यक मानकों,अभिलेखों, अधोसंरचना एवं सुविधाओं की जाँच की गई। निरीक्षण रिपोर्ट सरकार को प्रेषित कर दी गई। इस मामले में वर्तमान में यह मामला सरकार के स्तर पर लंबित है। हमें मौखिक रूप से अवगत कराया गया है कि सीएमओ कार्यालय से निर्देश प्राप्त होने तक फाइल को यथास्थिति में रखा गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन निरंतर सचिवालय स्तर पर फाइल का अनुसरण कर रहा है, और संबंधित विभाग भी आदेश की प्रतीक्षा कर रहा है। जैसे ही आदेश प्राप्त होगा, एनओसी जारी कर दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय का अपना अधिनियम (एसीटी) जो विधानसभा से पारित है। उस अधिनियम के अंतर्गत नर्सिंग कोर्स संचालित करने का प्रावधान है। तकनीकी रूप से विश्वविद्यालय को एनओसी की आवश्यकता नहीं है, फिर भी पारदर्शिता और विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत हमने सभी औपचारिकताएँ पूरी की हैं। जीएनएम और बीएससी नर्सिंग दोनों की प्रक्रिया एक समान रही है, निरीक्षण एक साथ हुआ है। जीएनएम के परीक्षाएँ सरकार एवं संबंधित परिषद द्वारा आयोजित की जाती हैं, जबकि बीएससी नर्सिंग की परीक्षाएँ विश्वविद्यालय द्वारा संचालित की जा रही हैं और परिणाम समय पर घोषित किए जा रहे हैं। कुछ विद्यार्थियों में भ्रम की स्थिति है, विशेषकर जीएनएम विद्यार्थियों में। हम उनसे निरंतर संवाद कर रहे हैं। हमने उन्हें आश्वस्त किया है कि यदि वे चाहें तो कलेक्टर महोदय या अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से भी मिल सकते हैं। मैं पूर्ण विश्वास के साथ यह कहना चाहता हूँ कि विद्यार्थियों को आरएनसी और आईएनसी की मान्यता प्राप्त होगी। सभी औपचारिकताएँ पूर्ण होने के बाद ही डिग्री प्रदान की जाएगी। किसी भी विद्यार्थी की डिग्री में देरी नहीं होगी और उनका शैक्षणिक भविष्य पूर्णत: सुरक्षित है।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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