◆ पत्थर लगाकर रोकी बस, यात्रियों ने कूदकर बचाई जान; जर्जर बसों को लेकर रोडवेज के खिलाफ आक्रोश
रावतभाटा, माय सर्कल न्यूज। चित्तौड़गढ़ के रावतभाटा से कोटा जा रही राजस्थान रोडवेज की एक बस मंगलवार सुबह बड़े हादसे का शिकार होते-होते बच गई। कोलीपुरा घाटे की चढ़ाई के दौरान तकनीकी खराबी और क्षमता से अधिक भार होने के कारण बस अचानक पीछे की ओर सरकने लगी। बस को पीछे खिसकता देख यात्रियों में चीख-पुकार मच गई, लेकिन कुछ यात्रियों की सूझबूझ से करीब 80 जिंदगियां सुरक्षित बच गईं।
यात्रियों के अनुसार, बस सुबह 9:30 बजे रावतभाटा से रवाना हुई थी। बस में क्षमता से कहीं अधिक करीब 70 से 80 सवारियां ठसाठस भरी हुई थीं। जैसे ही बस कोलीपुरा घाटे की चढ़ाई पर पहुँची, इंजन ने जवाब दे दिया। पर्याप्त पावर नहीं मिलने के कारण बस अचानक ढलान पर पीछे की ओर लुढ़कने लगी। बस में बैठे बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे बुरी तरह घबरा गए और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जब बस अनियंत्रित होकर पीछे जाने लगी, तो कुछ यात्रियों ने साहस का परिचय दिया। चलती बस से कूदकर यात्रियों ने सड़क किनारे पड़े बड़े पत्थर टायरों के पीछे लगा दिए। पत्थरों की ओट मिलने से बस रुक गई और खाई में गिरने या पीछे आ रहे अन्य वाहनों से टकराने से बच गई। इसके बाद आधे से अधिक यात्रियों ने पैदल ही घाटा चढ़ा, तब जाकर बस ऊपर तक पहुँच सकी।
रोडवेज की कार्यप्रणाली पर सवाल घटना के बाद यात्रियों ने विभाग के प्रति गहरा रोष व्यक्त किया। बसें कबाड़ हो चुकी हैं, फिर भी उन्हें लंबे और पहाड़ी रूटों पर चलाया जा रहा है। 50 सीटर बस में 80 यात्रियों को बैठाकर सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यह सीधे तौर पर यात्रियों की जान से खिलवाड़ है। अगर समय पर पत्थर नहीं लगाए जाते, तो आज बड़ी जनहानि हो सकती थी। प्रशासन को कंडम बसों और ओवरलोडिंग पर तुरंत रोक लगानी चाहिए। सुरेश कुमार-यात्री
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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