
चित्तौड़गढ़। राजस्थान सरकार के पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत ने कहा कि देश में महंगाई और अव्यवस्थाओं का असर अब आम आदमी की रसोई से लेकर किसानों के खेतों तक दिखाई देने लगा है। नवरात्रि जैसे पावन पर्व से पहले चावल की कीमतों में लगभग 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी और खाद वितरण में सामने आ रही अव्यवस्थाओं ने आमजन की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए अधिक खर्च करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर किसान खाद के लिए लंबी कतारों में खड़े होकर परेशान हो रहे हैं।
पूर्व राज्यमंत्री ने समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार कहा कि चावल की 26 किलोग्राम की बोरी की कीमत पहले 1,800 रुपये थी, जो बढ़कर 2,150 रुपये हो गई है। यानी एक बोरी पर 350 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। चावल जैसी रोजमर्रा की आवश्यक वस्तु के दाम बढ़ने का सीधा असर गरीब, मध्यमवर्गीय और मजदूर परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ता है। त्योहारों के इस समय में जब हर परिवार अपने घर में खुशियां मनाने की तैयारी करता है, तब बढ़ती महंगाई उनकी मुश्किलें और बढ़ा रही है।
नवरात्रि से पहले महंगाई की मार, आम आदमी कैसे मनाए त्योहार?
भाजपा सरकार महंगाई पर नियंत्रण और आमजन को राहत देने के अपने दावों के बीच आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर जवाबदेही सुनिश्चित करे। त्योहारों के समय खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के सामने अतिरिक्त आर्थिक दबाव पैदा होता है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जरूरी खाद्य वस्तुएं उचित कीमतों पर उपलब्ध हों और आमजन को राहत मिले।
खाद के लिए परेशान किसान, वितरण व्यवस्था पर सवाल
इसी तरह खाद वितरण को लेकर प्रकाशित समाचार में बताया गया है कि बारा जिले में खाद के लिए किसानों की लंबी कतारें लगीं। लगभग 1,000 टोकन बांटे जाने के बावजूद शाम तक करीब 300 किसानों को ही डीएपी खाद मिल पाई। खाद की उपलब्धता होने के बावजूद किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ा और वितरण व्यवस्था में गड़बड़ी के आरोप भी सामने आए।
खेती के महत्वपूर्ण समय में खाद के लिए किसानों को परेशान होना पड़े, यह गंभीर चिंता का विषय है। किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। सरकार और प्रशासन को खाद की उपलब्धता, पारदर्शी वितरण तथा कालाबाजारी पर नियंत्रण सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
आमजन और किसानों को राहत देना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
नवरात्रि जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के पर्व से पहले आम परिवार महंगाई की चिंता में घिरा हो और किसान खाद के लिए कतारों में खड़ा रहे, तो सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आवश्यकता इस बात की है कि सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि महंगाई पर नियंत्रण, आवश्यक वस्तुओं की उचित कीमतों और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कदम उठाए।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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