राजसमन्द। उदयपुर से भीलवाड़ा जाने वाले 150 किलोमीटर के टोल मार्ग के बीच में राजसमंद जिला मुख्यालय पर प्रवेश का वैकल्पिक मार्ग है मोही फाटक। लेकिन यह मोही फाटक चौराहा इन दोनों राहगीरो और वाहन चालकों के लिए डेंजर जोन बना हुआ है। इसका कारण है इस चौराहे पर 24 घंटे यातायात का दबाव रहता है। लेकिन यहां लाइट की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इसके साथ ही कांकरोली जाने वाले मार्ग पर अंडरपास के नाम से एक गड्ढा बना हुआ है। हाईवे के नीचे बने इस गड्ढे में कई बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी है। जिसमें कई लोग अपनी जान गवा चुके हैं तो कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं। इस समस्या पर न तो एनएचआई का ध्यान है और ना ही नगर परिषद का। जनप्रतिनिधियों ने इसके लिए प्रयास किया लेकिन उन्हें भी टका सा जवाब दे दिया गया। नगर परिषद इसे एन एचआईकी जिम्मेदारी बताती है जबकि एनएचआई इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। इन सब का खामियाजा यहां से प्रतिदिन गुजरने वाले दो पहिया और चौपाइया वाहन चालकों को भुगतना पड़ता हैं। जिन्हें यहां से गुजरते समय लगातार दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। कुछ समय पूर्व यहां एक बाइक इस गड्ढे में गिर गई थी। जिसमें दंपति की मौके पर दर्दनाक मौत हो गई जबकि एक 5 साल का मासूम आज भी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है। अंधेरे के कारण एक वर्ष पूर्व यहां दो बाइक की भिड़ंत हुई और पीछे आ रही ट्रक की चपेट में आने से पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। लेकिन उसे पर भी प्रशासन की नींद नहीं जागी।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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