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March 29, 2026 12:23 am

नई तकनीकी का ज्ञान लीजिए तब आपको पता चलेगा कि सरकार ने आपके लिए खजाना खोल रखा है- उपराष्ट्रपति धनखड़

चित्तौड़गढ़। भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ मेवाड़ के हरिद्वार कहे जाने वाले मातृकुंडिया दौरे पर रहे। हेलीपैड पर सांसद सीपी जोशी, मंत्री भगीरथ चौधरी, मंत्री लाल चंद कटारिया, मंत्री बाबू लाल खराड़ी और जिला कलक्टर व एसपी ने स्वागत किया।

हेलीपैड से सीधे उप राष्ट्रपति का काफिला मातृकुंडिया मन्दिर पहुंचा और उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मन्दिर में दर्शन किए। इसके बाद मातृकुंडिया में आयोजित जाट समाज के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शिरकत की। मंच पर सूरजकुंड के महाराज श्री श्री 1008 अवधेश चैतन्य महाराज का सभी ने आशीर्वाद लिया। उन्होंने यहां अखिल मेवाड़ क्षेत्रीय जाट महासभा को संबोधित किया। उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने उद्धबोधन में कहा कि वे मातृकुंडिया में 25 साल बाद आए हैं। 25 साल पहले यहां पर सामाजिक न्याय की शुरुआत हुई थी जिसमें उन्होंने भी भाग लिया था। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय पर इस आरक्षण पर जिनका लाभ मिला है, आज वह सरकार के प्रमुख पदों पर है।

उनको मेरा आग्रह रहेगा पीछे मुड़कर जरूर देखें और कभी नहीं भूले कि समाज के सहयोग की वजह से, समाज के प्रयास की वजह से हमें सामाजिक न्याय मिला। उनको समाज के इस कर्ज को अदा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के दूसरे सर्वोच्च पद पर विराजमान हुआ, तब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरी पहचान कृषक पुत्र के रूप में दी। यह शब्द मुझे बार-बार याद दिलाता है, मन को प्रभावित करता है कि संकल्पित रूप से किसान की सेवा करने के लिए मैं कोई कसर बाकी नहीं रखूंगा। उपराष्ट्रपति धनखड़ ने अपने उद्धबोधन में कहा कि जीवन पर्यंत किसानों का
हिमायती रहूंगा, क्योंकि किसान इस देश का अन्नदाता है, किसान भाग्य विधाता है, किसान के पास देश के विकास की कुंजी है। यह किसान की बहुत बड़ी पूंजी है। विकसित भारत का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए सपना नहीं है बल्कि लक्ष्य है और इस लक्ष्य में किसानों का योगदान रीढ़ की हड्डी की तरह होगा। किसान के आर्थिक व्यवस्था में जब उत्थान आता है तो देश की व्यवस्था में भी उत्थान आता है। उन्होंने कहा कि मातृकुंडिया में ही परशुरामजी पवित्र हुए थे।

शिवजी की आराधना की, शिवजी का निर्देश मिला। आप भी आज यहां से अपने लिए और पूरे किसान वर्ग के लिए संकल्प लेकर जाए। देश में 730 से भी ज्यादा किसान अनुसंधान केंद्र है। उनको
अकेला मत छोड़िए, वहां पर जाइए और उनसे कहिए कि आप हमारी क्या सेवा करेंगे। नई तकनीकी का ज्ञान लीजिए तब आपको पता चलेगा कि सरकार ने आपके लिए खजाना खोल रखा है। जिसकी जानकारी आपको नहीं है। विज्ञान केंद्र में जाने से कार्यरत लोगों की नींद खुलेगी। उन्होंने कहा कि किसान कृषि विज्ञान केंद्र
में महीने में 2 बार जाएंगे तो जो कार्यरत है, उनकी नींद खुलेगी। वह सक्रिय होंगे। उनको पता लगेगा की अन्नदाता जाग गया है। अन्नदाता की सेवा करनी पड़ेगी।अन्नदाता हमारा लेखा-जोखा ले रहा है और आप लेखा-जोखा लेंगे तो गुणात्मक सुधार आएगा। भारतीय किसान अनुसंधान केंद्र परिषद देश की पुरानी संस्था है। कृषि क्षेत्र में जो हमारे प्रबुद्धजन है उनका जीवंत रूप में उन संस्थाओं से लगाव होना चाहिए। आज हम संकल्पित होकर इस संस्थान का पूरा सदुपयोग करते हुए एक ऐसा रास्ता चुनेंगे, जिससे किसानों को आज से तीन काम करना पड़ेगा। करीब 28 मिनिट के उद्धबोधन में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किसानों पर ही फोकस रखा। उन्होंने कहा कि किसानों से आग्रह है कि दुनिया का सबसे बड़ा व्यापार कृषि उत्पादन का है, किसान अपने उत्पाद के व्यापार से क्यों नहीं जुड़ा हुआ है। किसान उसमें क्यों
नहीं भागीदारी ले रहा है। हमारे किसान प्रतिभाशाली है। ज्यादा से ज्यादा किसानों को सहकारिता का फायदा लेते हुए कृषि उत्पादन के क्षेत्र में कार्यरत होना चाहिए। लिखकर ले लीजिए इसके आर्थिक सकारात्मक परिणाम होंगे। दूसरा आग्रह है कि किसान अपने उत्पाद की मूल्य वृद्धि क्यों नहीं कर रहा। अनेक व्यापार किसान के उत्पादन पर चालू है। इसे हमें मिलकर करना चाहिए। किसान को पशुधन की ओर भी ध्यान देना चाहिए। मुझे बड़ी खुशी होती है जब डेयरियां बढ़ती है। ज्यादा से ज्यादा
उसमें किसान का योगदान होना चाहिए। किसानों को बनाए स्वावलंबी मुझे कई बार चिंता होती है कि किसान सब्जी लेने शहर जाता है। हमें किसान को स्वावलंबी करना होगा। गांव को शहरों पर निर्भर नहीं होना चाहिए, जबकि उल्टा होना चाहिए। खेती
में उत्पाद पैदा करने के साथ-साथ मार्केटिंग भी करनी चाहिए। उपराष्ट्रपति ने अपने उद्धबोधन में कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने जय जवान जय किसान का नारा दिया और अटल बिहारी वाजपेयी ने जय जवान, जय किसान और जय विज्ञान का नारा दिया था। हमारा ध्यान उस तरफ कम गया, जबकि उसे पर ज्यादा ध्यान जाना चाहिए था। प्रधानमंत्री मोदी ने एक कदम आगे बढ़ते हुए जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान का नारा लगाया है।

डेस्क/माय सर्कल न्यूज
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज

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