चित्तौड़गढ़। पशु पालकों के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित 1962 पशु एम्बुलेंस योजना की शुरुआत प्रदेश में की गई थी लेकिन अब पशु पालकों के लिए इस योजना पर संकट के बादल मंडराने लगा हैं। प्रदेश भर में 536 वाहनों को पशु एम्बुलेंस के लिए लगाया गया हैं और प्रत्येक पशु एम्बुलेंस पर तीन का स्टाफ लगाया था। प्रदेश में इस योजना को संचालित करने के लिए दो निजी कंपनियों को ठेका दिया गया। प्रदेशभर के 536 पशु एम्बुलेंस के 1608 कार्मिकों को पिछले तीन माह से सैलेरी नही देने समेत विभिन्न 16 सूत्री मांगों को लेकर पूरे प्रदेश में पशु एम्बुलेंस का स्टाफ हड़ताल पर उतर गए। इस मामले में शासन सचिव पशुपालन विभाग के नाम जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा।


उन्होंने कहा कि पर्याप्त दवाइयां भी उपलब्ध नही हो पा रही हैं। उनका कहना हैं कि प्रत्येक व्यक्ति से 25 से 50 हजार रुपए कम्पनी ने सिक्यूरिटी राशि के नाम से ली लेकिन उनकी कोई रसीद भी उन्हें नही दी हैं। आपको बता दे कि प्रति पशु एम्बुलेंस पर एक पायलट, एक कम्पाउंडर और एक डॉक्टर को लगाया जाता हैं। पशु पालक टोल फ्री 1962 पर कॉल करने पर जयपुर स्थित कॉल सेंटर पर बीमार पशु की कम्प्लेंट रजिस्टर होती हैं और वहां से सम्बंधित जिले के सम्बंधित पशुपालक ब्लॉक में स्थित पशु एम्बुलेंस को सूचना चली जाती। इसके बाद पशु एम्बुलेंस स्टाफ समेत पशु पालक के घर जाती हैं बीमार, घायल पशु का निशुल्क ईलाज करती हैं। लेकिन अब पशु एम्बुलेंस का स्टाफ हड़ताल पर उतरने से पशु पालकों को बीमार पशुओं को पशु चिकित्सालय तक लाना पड़ेगा और ईलाज करवाना पड़ेगा।
●इनको दिया पशु एम्बुलेंस का टेंडर
राजस्थान में पशु एम्बुलेंस (मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई) के संचालन के लिए मैसर्स केम्प और गुणेश इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को टेंडर दिया गया है। इस योजना का उद्देश्य दूरदराज के गांवों में पशुपालकों को उनके घर पर ही पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है।

Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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