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March 5, 2026 3:41 am

बेगूं में फसल विविधीकरण पर अधिकारियों का प्रशिक्षण आयोजित

बेगूं। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशालय के अंतर्गत फसल विविधीकरण परियोजना के तहत दो दिवसीय विस्तार अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें 25 कृषि अधिकारियों एवं कृषि पर्यवेक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में अतिरिक्त निदेशक (कृषि) डॉ. शंकर लाल जाट ने खरीफ फसलों की प्रमुख तकनीकों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने फसल विविधीकरण क्यों आवश्यक है, इसके लाभ एवं दीर्घकालिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंन कहा कि बदलते मौसम एवं बाजार की मांग को देखते हुए फसल विविधीकरण की आवश्यकता समय की मांग है। उन्होंने दलहनी एवं तिलहनी फसलों के विस्तार, उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों एवं सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
डॉ. हरि सिंह, प्रोफेसर एवं परियोजना प्रभारी (पायलट प्रोजेक्ट फॉर क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन) ने परियोजना की उपलब्धियों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंन फसल विविधीकरण में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवीन अनुसंधान परिणामों को अपनाने पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किसान फसल विविधीकरण अपनाकर नई फसलों की उत्पादकता एवं आय में कैसे वृद्धि कर रहे हैं और इससे मृदा स्वास्थ्य में भी सुधार हो रहा है।
कृषि अधिकारी हंसराज धाकड़ ने खरीफ-रबी मौसम में वैकल्पिक फसल प्रणालियों पर मार्गदर्शन दिया और फसल विविधीकरण के अंतर्गत लगने वाले रोग एवं कीट प्रबंधन पर विस्तार से बताया। उन्होंने रोकथाम एवं नियंत्रण की प्रभावी तकनीकों पर चर्चा की। हेमराज धाकड़ (कृषि अधिकारी) ने जैविक एवं प्राकृतिक खेती तकनीकों के उपयोग और मृदा स्वास्थ्य सुधार पर बल दिया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर नरेंद्र यादव ने फसल विविधीकरण के आर्थिक लाभ और किसानों की आय दोगुनी करने में इसकी भूमिका समझाई, व कार्यक्रम में उपस्थित सभी विशेषज्ञों, अधिकारियों एवं संकाय सदस्यों का आभार व्यक्त किया। प्रशिक्षण के सफल संचालन में तकनीकी दल के रामजी लाल बडसरा की सक्रिय भूमिका रही। प्रशिक्षण के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और विशेषज्ञों से समाधान प्राप्त किए। अधिकारियों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया।

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