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February 6, 2026 7:41 am

कार्यवाई करने गए साइबर डिप्टी पर ही अपहरण और फिरौती का केस दर्ज, पढ़े पूरी ख़बर

चित्तौड़गढ़। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ पुलिस महकमे में एक ऐसा फिल्मी ड्रामा सामने आया है जिसने खाकी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर अपराधियों को जेल भेजने वाली पुलिस यहाँ खुद अपनों के ही निशाने पर है। मामला साइबर सेल के डिप्टी गिरिराज गर्ग से जुड़ा है, जिन पर एक वांछित अपराधी को पकड़ने के बदले अपहरण, मारपीट और 5 लाख की फिरौती मांगने का मुकदमा दर्ज किया गया है। सदर थाने में दर्ज एफआईआर के अनुसार, कुंभानगर निवासी मनीष मालानी ने आरोप लगाया है कि मंगलवार रात करीब 11 बजे साइबर डीएसपी गिरिराज गर्ग ने अपनी निजी गाड़ियों से उनकी स्कूटी को घेरा। डिप्टी के साथ कुछ निजी लोग भी मौजूद थे। आरोप है कि उन्होंने हिमांशु माहेश्वरी नामक युवक को जबरन गाड़ी में पटका, उसके साथ मारपीट की और छोड़ने के बदले 5 लाख रुपये की मांग की। इस मामले में डिप्टी गिरिराज गर्ग की कहानी बिल्कुल अलग है। डिप्टी का तर्क है कि हिमांशु माहेश्वरी साइबर थाने का एक वांछित अपराधी है, जिसके खिलाफ जुर्म प्रमाणित हो चुका है। जब उन्होंने साइबर थाना प्रभारी ठाकराराम से पुलिस वाहन मांगा, तो उन्होंने मना कर दिया। कर्तव्य पालन के लिए डिप्टी ने अपनी निजी गाड़ी से आरोपी का पीछा कर उसे दबोचा और साइबर थाना प्रभारी को सौंपा। थाना प्रभारी ने आरोपी को गिरफ्तार करने के बजाय उसे सदर थाने ले जाकर अपने ही उच्च अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया। इस पूरे विवाद पर जब जिला पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि जो ठीक लगा वो किया, इसमें मेरा कोई व्यक्तिगत पक्ष नहीं है। घटनाक्रम दुर्भाग्यपूर्ण है, अब जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी। सदर पुलिस ने डिप्टी गिरिराज गर्ग और उनके साथी अनिल सनाढ्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 140 (3), 308 (2), 115 (2) व 126 (2) में दर्ज किया गया। महकमे में चर्चा है कि अगर फील्ड में काम करने वाले अधिकारियों पर बिना विभागीय जांच के सीधे अपहरण जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर होगी, तो भविष्य में कोई भी पुलिसकर्मी अपराधियों पर हाथ डालने से डरेगा। फिलहाल, मामले की जांच एएसआई मुरलीदास को सौंपी गई है।

◆साइबर प्रकरण में वांछित है हिमांशु

इस मामले में साइबर के पुलिस उपाधीक्षक गिरिराज गर्ग ने बताया कि साइबर थाने में दर्ज प्रकरण 10/2025 में हिमांशु के विरूद्ध जुर्म प्रमाणित है। उसने बताया कि इस मामले में पूर्व में हर्षवर्धन को गिरफ्तार किया है और लेपटॉप में डुप्लीकेसी पाये जाने के बाद हिमांशु माहेश्वरी को 1 जनवरी को सदर थाने में उपस्थित होने के लिए कहा तो उसने अपने अधिवक्ता के माध्यम से आगे की तारीख की मांग की और फरार हो गया। उन्होंने बताया कि बीती रात मुखबिर से सूचना मिली कि हिमांशु माहेश्वरी और एक अन्य व्यक्ति स्कूटी पर घूम रहे है। जिस पर मैनें साइबर थाना प्रभारी ठाकराराम को इसकी सूचना दी, लेकिन ठाकराराम ने वाहन नहीं भेजा तो मामले की गंभीरता को देखते हुए मैनें अपने मित्र अनिल सनाढ्य को निजी गाड़ी में लिया और दो मुखबिरों के साथ स्कूटी को रोककर हिमांशु माहेश्वरी को साइबर थाने ले जाकर ठाकराराम को सौंप दिया। अब मुझे जानकारी मिली है कि ठाकराराम उन्हें सदर थाने ले गया और मेरे खिलाफ ही प्रकरण दर्ज कराया।

इधर साइबर डिप्टी गिरीराज ने भी साइबर पुलिस थाना में पदस्थ पुलिस निरीक्षक ठाकराराम पर वांछित अपराधी से मिलीभगत कर गिरफ्तारी से बचाने और दोषियों के विरुद्ध विभागीय एवं विधिक कार्यवाही करने व इस मामले में झूठा प्रकरण दर्ज किए जाने को लेकर एसपी चित्तौड़गढ़, पुलिस महानिदेशक जयपुर, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक जयपुर और पुलिस महानिरीक्षक उदयपुर रेंज को रिपोर्ट भेजी हैं।

डेस्क/माय सर्कल न्यूज
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज

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