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February 6, 2026 7:41 am

केंद्रीय बजट में मध्यम वर्ग की अनदेखी, रोजगार और किसानों के लिए केवल खोखले वादे वाला एक निराशाजनक बजट : पूर्व मंत्री आंजना

निंबाहेड़ा। पूर्व सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने कहां की आज संसद में पेश किया गया केंद्रीय बजट 2026-27 आम जनता की उम्मीदों पर पूरी तरह से पानी फेरने वाला है। सरकार ने बड़े-बड़े शब्दों और ‘कर्तव्य’ के नाम पर आंकड़ों की बाजीगरी तो की है, लेकिन धरातल पर आम आदमी की समस्याओं का कोई ठोस समाधान पेश नहीं किया है।

बजट में मध्यम वर्ग और करदाताओं को फिर मिली निराशा :
पूर्व सहकारिता मंत्री आंजना ने कहा कि सरकार ने ‘नया आयकर अधिनियम 2025’ लागू करने की बात तो की, लेकिन इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव न करके वेतनभोगी वर्ग को खाली हाथ छोड़ दिया है। महंगाई के इस दौर में कर राहत की उम्मीद लगाए बैठे मध्यम वर्ग के साथ यह एक बड़ा मजाक है।

रोजगार सृजन का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं :
पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सुभाषचंद्र शारदा ने कहां की बजट में बड़े बुनियादी ढांचे पर खर्च का दावा किया गया है, लेकिन शिक्षित युवाओं के लिए तत्काल रोजगार पैदा करने की कोई ठोस योजना नहीं है। ‘चैंपियन MSMEs’ की बात केवल कागजों तक सीमित दिखती है,जबकि छोटे उद्योग अभी भी जीएसटी और जटिल अनुपालन की मार झेल रहे हैं।

किसानों की आय और सुरक्षा पर चुप्पी :
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष संपत धाकड़ ने कहां की बजट में किसानों के लिए ‘भारत विस्तार’ जैसे AI सिस्टम की बात की गई है, लेकिन स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार MSP की कानूनी गारंटी और बढ़ती लागत पर कोई बात नहीं हुई। कृषि क्षेत्र के लिए आवंटित राशि बढ़ती महंगाई के अनुपात में अपर्याप्त है।

बढ़ता वित्तीय घाटा और उधारी का बोझ :

नगर कांग्रेस अध्यक्ष बंशीलाल राईवाल ने कहां की सरकार 17.2 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम उधारी की योजना बना रही है, जो भविष्य में अर्थव्यवस्था पर ब्याज का बोझ बढ़ाएगी। राजकोषीय घाटे को 4.3% पर लाने का लक्ष्य तो रखा गया है, लेकिन राजस्व संग्रह में कमी इस लक्ष्य को संदिग्ध बनाती है।

बचत और निवेश पर प्रहार :
ब्लॉक कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष भोपराज टांक ने कहा कि फ्यूचर एंड ऑप्शंस (F&O) पर प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) में बढ़ोतरी और शेयर बायबैक पर ‘कैपिटल गेन्स टैक्स’ लगाने जैसे कदमों से छोटे निवेशकों के मनोबल पर चोट पहुँचेगी। यह निवेश को प्रोत्साहित करने के बजाय नियंत्रित करने वाला बजट है।

शिक्षा और स्वास्थ्य की अनदेखी :
नगर कांग्रेस संगठन महासचिव रविप्रकाश सोनी ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में कोई क्रांतिकारी सुधार या बजट में बड़ी वृद्धि नहीं देखी गई है। उच्च शिक्षण संस्थानों के वादे तो किए गए हैं, लेकिन मौजूदा संस्थानों की बदहाली को दूर करने के लिए फंड की कमी साफ झलकती है।

पूर्व सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने कहा कि केंद्र सरकार पिछले 11 वर्षों से केवल खोखले वादे करती आई है एवं पूर्व के बजट में किए गए वादों को भी आज तक जमीन पर नहीं ला पाई है जिसका परिणाम यह है कि मध्यम एवं निचले उद्योग इसकी भारी मार झेल रहे हैं एवं युवाओं को भी रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे हैं जिससे अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। भारत की आबादी लगभग डेढ़ सौ करोड़ होने के बावजूद हम जो विकास की गति पा सकते हैं उसे सरकार की दिशाहीन नीतियों की वजह से उस लक्ष्य को नहीं पा रहे हैं जिससे भारत को नुकसान हो रहा है। साथ ही भारत सरकार अपनी दिशाहीन आर्थिक, विदेश एवं व्यापार नीतियों की वजह से पिछले कुछ समय से हर मोर्चे पर विफल रही है जिसका परिणाम आज इस बजट में भी देखने को मिला है। साथ ही आंजना ने यह भी कहां की देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान का बजट भाषण में कोई जिक्र न होना प्रदेश के साथ हो रहे सौतेलेपन की झलक है। ERCP को लेकर कोई जिक्र नहीं हुआ,न ही राजस्थान में किसी नई रेलवे परियोजना या मेट्रो प्रोजेक्ट की घोषणा हुई। गरीब,श्रमिकों और असंगठित क्षेत्र की बड़ी आबादी के लिए कोई राहत का बड़ा ऐलान नहीं हुआ है। कुल मिलाकर डबल इंजन के बावजूद यह बजट राजस्थान के लिए यानी ऊंची दुकान फीका पकवान साबित हुआ है।

डेस्क/माय सर्कल न्यूज
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज

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