जयपुर/बीकानेर। राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था में भजनलाल सरकार ने एक क्रांतिकारी बदलाव करने का निर्णय लिया है। प्रदेश के स्कूलों में अब कक्षा 5वीं और 8वीं के विद्यार्थियों को बिना मेहनत किए अगली कक्षा में प्रमोट नहीं किया जाएगा। सरकार ने वर्षों से चली आ रही ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ (ऑटोमैटिक प्रमोशन सिस्टम) को समाप्त कर दिया है। अब इन कक्षाओं के छात्रों को अगली कक्षा में प्रवेश पाने के लिए अनिवार्य रूप से न्यूनतम अंक प्राप्त करने होंगे।
पढ़ाई के प्रति गंभीरता लाना मुख्य उद्देश्य
शिक्षा विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया कि बिना परीक्षा पास किए अगली कक्षा में पहुंचने के कारण बच्चों में पढ़ाई के प्रति गंभीरता कम हो गई थी। इसका सीधा असर उनके ‘लर्निंग आउटकम’ (सीखने की क्षमता) पर पड़ रहा था। छात्र जब बिना बुनियादी ज्ञान के 9वीं या 10वीं कक्षा में पहुँचते थे, तो उन्हें भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता था। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए यह कड़ा फैसला लिया गया है।
◆फेल होने पर मिलेगा एक और मौका (रिमेडियल टीचिंग)
नए नियमों में छात्रों के भविष्य का भी ख्याल रखा गया है। यदि कोई विद्यार्थी मुख्य परीक्षा में न्यूनतम अंक प्राप्त करने में असफल रहता है, तो उसे सीधे उसी कक्षा में नहीं रोका जाएगा।
- 45 दिनों का अवसर: फेल होने वाले छात्रों को सुधार के लिए 45 दिनों के भीतर दोबारा परीक्षा देने का मौका दिया जाएगा।
- विशेष कक्षाएं: इस अवधि के दौरान स्कूलों में ‘रिमेडियल टीचिंग’ यानी विशेष शिक्षण की व्यवस्था की जाएगी, ताकि छात्र अपनी कमजोरियों को दूर कर सकें और दोबारा परीक्षा में सफल हो सकें।
शिक्षक और अभिभावकों की बढ़ेगी जवाबदेही
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न केवल छात्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि शिक्षकों और अभिभावकों की जवाबदेही भी तय होगी। अब बच्चों की पढ़ाई की निगरानी बेहतर तरीके से हो सकेगी। विभाग के अनुसार, इस बदलाव का अंतिम लक्ष्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना, ड्रॉपआउट रेट को कम करना और छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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