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August 26, 2026 11:56 pm

मातृकुंडिया में महाशिवरात्रि पर उमड़े श्रद्धालु,मंगलेश्वर महादेव सहित शिव मंदिरों में हुई पूजा-अर्चना

राशमी। मेवाड़ के हरिद्वार के नाम से प्रसिद्ध मातृकुंडिया स्थित मंगलेश्वर महादेव सहित अन्य शिव मंदिरों में महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने उत्साह के साथ भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना और अभिषेक किया।
दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। शिव भक्तों ने भोलेनाथ को केले, मिश्री, हलवा, खीर और विभिन्न फल-फ्रूट का प्रसाद चढ़ाया, जिसे बाद में श्रद्धालुओं में वितरित किया गया।
मातृकुंडिया में बनास नदी में लक्ष्मण झूले के पीछे स्थापित 51 फीट लंबा त्रिशूल आकर्षण का केंद्र बना रहा। पुजारी राजेश पुरी,आनंदपुरी जगदीशपुरी,मांगिरत पुरी ने बताया कि मातृकुंडिया मेवाड़ का एक अत्यंत प्राचीन तीर्थ स्थल है। आमजन में ऐसी मान्यता है कि यहां के कुंड में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और अस्थियां विसर्जित करने से मोक्ष प्राप्त होता है। इसी कारण प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु अपने दिवंगत परिजनों की अस्थियां विसर्जित करने यहां आते हैं, और इसे मेवाड़ का हरिद्वार भी कहा जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, भगवान परशुराम उन सात अमर देवों में से एक हैं जिनके बारे में माना जाता है कि वे अभी भी धरती पर निवास करते हैं। उन्होंने अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए अपनी माता का वध किया था। पिता के प्रसन्न होने पर जब उन्होंने वरदान मांगने को कहा, तो परशुराम ने अपनी माता को पुनः जीवित करने का वरदान मांगा। वह स्थान जहां परशुराम जी ने अपनी माता का वध किया और जहां उन्होंने इस पाप से मुक्ति पाई, दोनों ही राशमी मातृकुंडिया में स्थित हैं। यहीं पर भगवान परशुराम ने शिव जी की तपस्या की थी और शिवजी के निर्देशानुसार मातृकुंडिया के जल में स्नान कर अपने पापों का प्रायश्चित किया था। महाशिवरात्रि पर्व को लेकर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मातृकुंडिया में सहायक उप निरीक्षक रमेश चंद्र वैष्णव अपने जाप्ते सहित तैनात रहे।

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