चित्तौड़गढ़। जिले के वन्यजीव प्रेमियों और वन विभाग के लिए इस बार की वन्यजीव गणना बेहद खास होने जा रही है। भीषण गर्मी और हीटवेव के प्रकोप को देखते हुए वन विभाग ने दशकों पुरानी परंपरा को बदलते हुए गणना के समय में एक अहम बदलाव किया है। पहली बार यह गणना सुबह के बजाय शाम को शुरू होगी, ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक विचरण का सटीक डेटा जुटाया जा सके। जिला उप वन संरक्षक मृदुला सिन्हा बताया कि पूर्व में गणना सुबह 8 बजे से शुरू होती थी, लेकिन इस बार यह एक मई को शाम पांच बजे से शुरू होकर दो मई को शाम 5 बजे तक लगातार 24 घण्टे तक चलेगी। वन विभाग ने सीतामाता और बस्सी वन्यजीव अभयारण्य में फील्ड वर्क पूरा कर लिया है। गणना को त्रुटिहीन बनाने के लिए वॉटर हॉल तकनीक और आधुनिक उपकरणों का सहारा लिया जा रहा है। सीतामाता सेंचुरी में 47 और बस्सी सेंचुरी में 24 वॉटर हॉल चिह्नित किए गए हैं। वन्यजीवों की प्यास बुझाने के इन केंद्रों पर विशेष निगरानी रहेगी। मानवीय गणना के साथ-साथ तकनीक का भी उपयोग होगा। सीतामाता में 20 से 22 और बस्सी सेंचुरी में 14 कैमरा ट्रेप लगाएं गए हैं। जो रात के अंधेरे में सक्रिय रहने वाले जीव पैंथर, उड़न गिलहरी समेत अन्य वन्यजीव की पहचान करेंगे। नालों और केनाल के पास विशेष मचान बनाए गए हैं। साथ ही वन्यजीवों के रास्ते पर भी नजर रखी जाएगी। यह गणना बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित की जा रही है। चांदनी रात होने के कारण वन कर्मियों को बिना कृत्रिम रोशनी के वन्यजीवों को देखने में आसानी होती है। इस कार्य के लिए एसीएफ राम मोहन मीणा और एसीएफ यशवंत कंवर के निर्देशन में कर्मचारियों को पदचिह्नों की पहचान और कैमरा ट्रैप प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। 24 घंटे मचान पर बैठने वाले स्टाफ के लिए भोजन और पानी की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। विभाग का मानना है कि इस बार के बदलाव से चित्तौड़गढ़ के जंगलों में जैव-विविधता की एक नई और स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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