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June 17, 2026 2:22 am

सीबीएन अधिकारियों पर मारपीट, अवैध वसूली और झूठे अफीम प्रकरण में फंसाने के गंभीर आरोप

निंबाहेड़ा। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो नीमच और कोटा के कुछ अधिकारियों पर मारपीट, अवैध वसूली, धमकी देने तथा झूठे मादक पदार्थ प्रकरण में फंसाने के गंभीर आरोप लगे हैं। बाड़ी निवासी युधिष्ठिर धोबी की ओर से न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय निंबाहेड़ा में परिवाद प्रस्तुत किए जाने के बाद सदर थाना निंबाहेड़ा में मामला दर्ज किया गया है। प्रकरण की जांच निंबाहेड़ा पुलिस उपाधीक्षक को सौंपी गई है। निंबाहेड़ा पुलिस उपाधीक्षक बद्रीलाल राव ने बताया कि परिवादी युधिष्ठिर धोबी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि 20 नवंबर की रात उसके भाई पवन उर्फ दिनेश तथा आरिफ बाड़ी स्थित विक्रम आंजना के खेत पर मजदूरी कर रहे थे। इसी दौरान रात करीब 10:30 बजे सीबीएन नीमच के अधिकारी तीन वाहनों में वहां पहुंचे और दोनों से पूछताछ के नाम पर मारपीट की। अधिकारियों ने खेत स्थित कुएं की तलाशी ली, लेकिन कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिलने पर कथित रूप से दोनों के साथ दुर्व्यवहार किया। शिकायत के अनुसार अधिकारियों ने कुएं में रखे 35 हजार रुपये जबरन अपने कब्जे में ले लिए तथा मौके पर आए एक अधिकारी ने दोनों से सादे कागजों पर हस्ताक्षर करवाए। विरोध करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई। घटना की शिकायत 27 नवंबर को सदर थाना निंबाहेड़ा में दी गई थी।

परिवादी का आरोप है कि शिकायत के बाद सीबीएन कर्मचारियों ने पवन, आरिफ और विक्रम आंजना पर लगातार दबाव बनाना शुरू कर दिया तथा समझौते के लिए मजबूर किया। झूठे प्रकरण में फंसाने की धमकियों के चलते एक दिसंबर को उन्हें समझौता करने के लिए विवश होना पड़ा।

पिस्टल दिखाकर झूठे अफीम प्रकरण में फंसाने का आरोप

शिकायत में आगे आरोप लगाया गया है कि 15 जनवरी को सीबीएन कोटा के उप निरीक्षक ज्ञान सिंह, निरीक्षक ललित कुमार झा और हवलदार एम. योगेश एक सफेद वाहन से बाड़ी चौराहे पर पहुंचे। उन्होंने पवन और आरिफ को शनिमहाराज के दर्शन कराने का बहाना बनाकर वाहन में बैठाया। गांव से बाहर निकलने के बाद कथित रूप से दोनों को पिस्टल दिखाकर जान से मारने की धमकी दी गई और उनके साथ मारपीट की गई। परिवादी का आरोप है कि अधिकारियों ने उनसे अवैध रूप से धन की मांग की तथा यह कहते हुए धमकाया कि नारकोटिक्स विभाग के खिलाफ शिकायत करने का परिणाम उन्हें भुगतना पड़ेगा। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने अपने साथ लाई गई अफीम दोनों के पास जबरन रखकर सीबीएन कोटा में दर्ज एफआईआर संख्या 02/2026 में उन्हें आरोपी बनाया और 16 जनवरी को जेल भिजवा दिया।

पहले नहीं हुई कार्रवाई, न्यायालय की शरण लेनी पड़ी

परिवादी के अनुसार उसने 21 जनवरी को सदर थाना निंबाहेड़ा तथा 5 फरवरी को पुलिस अधीक्षक, चित्तौड़गढ़ को लिखित शिकायत प्रस्तुत की थी, लेकिन मामला दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद न्यायालय की शरण लेने पर न्यायिक हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया।

◆ सीसीटीवी, सीडीआर और जीपीएस जांच की मांग

शिकायतकर्ता ने बाड़ी चौराहे और राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, संबंधित अधिकारियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड  तथा वाहनों की जीपीएस लोकेशन की जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी अधिकारियों के विरुद्ध मारपीट, अवैध वसूली, धमकी और झूठे साक्ष्य तैयार करने संबंधी धाराओं में कार्रवाई करने तथा पवन और आरिफ को कथित झूठे प्रकरण से राहत दिलाने की अपील की है। पुलिस उपाधीक्षक बद्रीलाल राव ने बताया कि सदर थाना निंबाहेड़ा में दर्ज मामले की जांच जारी है तथा तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

डेस्क/माय सर्कल न्यूज
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज

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