


◆ चित्तौड़गढ़ निर्दलीय विधायक चन्द्रभान पर भी लटकी तलवार
चित्तौड़गढ़। राजस्थान के भीलवाड़ा से निर्दलीय विधायक अशोक कोठारी की विधायकी पर कानूनी चुनौती खड़ी कर दी हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 191(2) और 10वीं अनुसूची (दल-बदल कानून) के तहत उनकी विधायकी रद्द करने के लिए महामहिम राज्यपाल और राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिका दायर की गई है।
इस याचिका के बाद अब चित्तौड़गढ़ से निर्दलीय विधायक चन्द्रभान सिंह आक्या की सदस्यता पर भी तलवार लटकती नज़र आ रही है। नगर निकाय चुनाव के बाद राजस्थान के सियासी गलियारों में अचानक हलचल तेज़ हो गई है। भाजपा के पूर्व पार्षद राजेश सिंह सिसोदिया ने राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष सबूतों के साथ याचिका दाखिल कर भीलवाड़ा के निर्दलीय विधायक अशोक कोठारी की सदस्यता को चुनौती दी है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि अशोक कोठारी ने निर्दलीय चुनाव जीतने के बावजूद लगातार भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रियता दिखाई। उन्होंने गले में भाजपा का दुपट्टा डालकर बैठकों में हिस्सा लिया, भाजपा के चुनाव कार्यालयों का उद्घाटन किया और मंचों से पार्टी प्रत्याशियों को जिताने की अपील की।
◆ संविधान और नियम क्या कहते हैं..?
अनुच्छेद 191(2) व 10वीं अनुसूची (पैरा 2): यदि कोई व्यक्ति निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है या उसके पक्ष में कार्य करता है, तो वह सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य हो जाता है।
आचरण बना आधार: सिर्फ पार्टी का गमछा पहनना अयोग्यता सिद्ध नहीं करता, लेकिन रैलियों में पार्टी प्रत्याशी के लिए वोट मांगना और दफ्तरों का उद्घाटन करना कानूनी रूप से अयोग्यता का आधार बन सकता है।
भीलवाड़ा का मामला सामने आने के बाद अब चित्तौड़गढ़ के निर्दलीय विधायक चन्द्रभान सिंह आक्या पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। चन्द्रभान ने निर्दलीय चुनाव जीतकर भाजपा प्रत्याशी नरपत सिंह राजवी की जमानत जब्त कराई थी। लेकिन चुनाव जीतने के बाद वे भी लगातार भाजपा के कार्यक्रमों में सक्रिय हैं, पार्टी के चुनाव चिन्ह और बड़े नेताओं के फोटो का इस्तेमाल कर रहे हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही उनकी विधायकी को भी इसी आधार पर कानूनी चुनौती दी जा सकती है। निर्दलीय विधायकों के खिलाफ दायर इस याचिका ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। एक तरफ जहां बड़े नेताओं की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कानून के जानकार इसे एक बड़ा मिसाल बनने वाला मामला मान रहे हैं। अब देखना होगा कि विधानसभा अध्यक्ष और राज्यपाल इस याचिका पर क्या फैसला लेते हैं।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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