
चित्तौड़गढ़। हिंदुस्तान जिंक अब बीलिया चौराहा वाला अपना एकमात्र गेट बंद करने की तिकड़म में लगा हुआ है, जबकि गाँव की 5-7 बीघा चारागाह भूमि कारखाने की विस्तारित ग्रीनबेल्ट परिसर में आ रही है। इसके चलते शनिवार सुबह बीलिया चौराहे की ओर खुले भाग को बंद करने जिंक के कथित ठेकेदारों ने जेसीबी से नींव खोद डाली और ट्रैक्टर आदि से ईंट-पत्थर डाल दिए, जिसका ग्रामीणों ने विरोध करते हुए नींव वापस भर दी। इस पर नगरी पटवारी और रिको चौकी प्रभारी ने भी मौका मुआयना किया। सरपंच एवं उपसरपंच सहित मौके पर कई ग्रामीण मौजूद थे।
ग्रामीणों का यह कहना है कि जिंक के परिक्षेत्र में आ रही उक्त चरणोट भूमि के बदले अन्यत्र भूमि दे दी जाए या इसका उचित मुआवजा दिया जाए, तभी यह खुला भाग बंद करने दिया जाएगा। इस चारागाह भूमि का रिकॉर्ड क्षेत्रीय हल्का पटवारी के पास है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से उक्त चारागाह भूमि को जिंक के कब्जे से तत्काल बाहर निकालने की मांग की। मजेदार बात यह है कि जिंक बीलिया गाँव के ही कुछ लोगों को प्रलोभन देकर उक्त रास्ता बंद करवाने की फिराक में है। मगर पेंच तब फंस गया जब यहाँ के युवाओं ने जिंक से रोजगार की मांग करते हुए उक्त चारागाह भूमि को परिसर से बाहर निकालने की आवाज उठाई। गौरतलब है कि जिंक प्रदूषण से बीलिया की जमीन और पानी दूषित हो गए हैं। यहां पेयजल भी 3 किमी दूर से बमुश्किल आ रहा है। स्थानीय कई आईटीआई, डिप्लोमाशुदा योग्य युवा रोजगार की आस लिए बेरोजगार घूम रहे हैं, जबकि हर दृष्टि से बीलिया अन्य गांवों की अपेक्षा अधिक परेशानी झेले हुए है और जिंक मैनेजमेंट बाहरी लोगों को रोजगार देकर क्षेत्रीय युवाओं को जॉब देने के नाम पर हमेशा पल्ला झाड़ता रहता है।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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