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April 18, 2026 9:33 am

जिले में 30 किसान कर रहे स्ट्राबेरी की खेती, एक बीघा से कमा रहे डेढ़ से दो लाख रूपये, पढ़े खबर

चित्तौड़गढ़, (सलमान). परंपरागत फसलों की खेती में किसान हर साल भारी नुकसान झेल रहे हैं. फसलों पर कभी बारिश तो कभी सूखे की मार पड़ने से इसका असर किसानों पर पड़ता रहता है. यही वजह है कि किसान भारी नुकसान से बचने के लिए कम लागत और अधिक मुनाफे देने वाली नई-नई फसलों की तरफ रुख कर रहे हैं. आज हम बात करने जा रहे स्ट्रॉबेरी की खेती की…

स्ट्रॉबेरी की खेती अब ठंडे प्रदेशों के अलावा राजस्थान में भी पिछले कुछ सालों से होने लगी हैं।

यह फसल 30 डिग्री तक के तापमान में होती हैं इसलिए इसे रबी की फसल में गिना जाता हैं। स्ट्राबेरी के पौधों की रोपाई सितम्बर से नवम्बर तक की जा सकती है.

चित्तौड़गढ़ जिले में जहां पहले कुछ किसान ही सीमित क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की खेती करते थे लेकिन अब दिनों दिन इस खेती में किसान अपनी रुचि दिखा रहे हैं। जिले में करीब 30 किसान 8-10 हेक्टेयर में स्ट्रॉबेरी की खेती करने लगे हैं। स्थानीय जमीन इस खेती के लिए पूरी तरह अनुकूल साबित हो रही है। यह फसल 30 डिग्री तक के तापमान में होती हैं इसलिए इसे रबी की फसल में गिना जाता हैं। स्ट्राबेरी के पौधों की रोपाई सितम्बर से नवम्बर तक की जा सकती है. ऐसे में किसान रबी सीजन में इसकी खेती कर अच्छा उत्पादन और मुनाफा दोनों कमा सकते हैं.

एक प्लास्टिक के डिब्बे में 200 से 250 ग्राम स्ट्रॉबेरी का फल भरा जाता है। फल तोड़ने के बाद यथाशीघ्र फलों का विपणन करना पड़ता है। यदि तुड़ाई के बाद फलों को ठंडे स्थान पर नहीं रखा जाता है तो फल 2-3 दिन में ही खराब हो जाते हैं।

स्ट्राबेरी शीतोष्ण जलवायु में पाये जाने वाला एक फल है. लेकिन अब हमारें कृषि वैज्ञानिकों ने अपने प्रयासों से इसकी विभिन्न प्रकार की किस्मों को विकसित किया है. जिसे गर्म इलाकों में भी अब किसान इसकी खेती कर रहे हैं. विटामिन सी, लौह व खनिज तत्व की प्रचुर मात्रा होने के कारण इस फल का सेवन रक्त अल्पता से ग्रसित रोगियों के लिए बहुत ही लाभप्रद पाया गया है। तैयार खेत में ट्रेक्टर अथवा फावड़े की सहायता से एक मीटर चौड़ी व 20-25 सेंटीमीटर ऊँची मेड तैयार करते हैं और स्ट्रॉबेरी के पौधों का रोपण किया जाता हैं। अत्याधिक नाजुक होने की वजह से स्ट्राबेरी के फलों को छोटे एवं पारदर्शी प्लास्टिक के डिब्बे में पैक करते हैं।

एक प्लास्टिक के डिब्बे में 200 से 250 ग्राम स्ट्रॉबेरी का फल भरा जाता है। फल तोड़ने के बाद यथाशीघ्र फलों का विपणन करना पड़ता है। यदि तुड़ाई के बाद फलों को ठंडे स्थान पर नहीं रखा जाता है तो फल 2-3 दिन में ही खराब हो जाते हैं। आपको बता दें कि स्ट्राबेरी की फसल से जैम, जूस, आइसक्रीम, मिल्क-शेक, टॉफियां बनाने के काम आती है. इसके अलावा कई तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट बनाने में भी इसके फलों का उपयोग किया जाता है. स्वास्थ्य के लिहाज से स्ट्रॉबेरी फल का सेवन बेहद लाभकारी माना जाता है. यह फल विटामिन सी का काफी अच्छा स्रोत है. स्ट्रॉबेरी की खेती में सब कुछ मिलाकर पौधे की कीमत से लेकर मरल्चिंग और ड्रिप इरिगेशन जैसी तकनीकों का उपयोग कर किसान प्रति बीघा के डेढ़ से दो लाख रुपए का मुनाफा कमा सकते हैं।

डेस्क/माय सर्कल न्यूज
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज

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