Explore

Search

March 8, 2026 8:01 am

जहां गोपाल विराजे वह धरती वन्दनीय है-डा. ओझा


कानोड़। नगर स्थापना दिवस पर पीएम श्री चतुर उ.मा.विद्यालय में इतिहास संकलन समिति की ओर से इतिहास दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता रमेश चन्द्र शुक्ल ने की । कानोड नगर के इतिहास को लिखने वाले पण्डित उदय जैन महाविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक डा.जमनेश कुमार ओझा मुख्य वक्ता थे। कार्यक्रम की शुरुआत भगवती शर्मा व गगन व्यास की दीप वन्दना से हुई। मुख्य वक्ता के उद्बोधन से पूर्व दीपक शर्मा ने इतिहास गान पर काव्य पाठ किया ।
डा. ओझा ने श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि 31 अगस्त 1711 में कानोड को संग्राम सिंह के कार्यकाल में प्रथम ठिकाणे का दर्जा मिला इसलिए यह केवल स्थापना दिवस नहीं है कानोड का कालखण्ड तो बहुत पुराना है , कानोड का जिक्र तो तुगलक काल के तारीख ए फिरोजशाही में 1357 में भी मिलता है । डा. ओझा ने कहा कि यह तो वह धरती है जहां रावत नाहर सिंह के समय अयोध्या निवासी रसिक बिहारी ने अपना प्रसिद्ध ग्रंथ रामरसायन सहित 31 ग्रंथों की रचना की जो कानोड नगर के लिए गर्व की बात है । सामाजिक समरसता पर बोलते हुए ओझा ने कहा कि कानोड नगर सामाजिक समरसता का अद्भुत उदाहरण है यहां कोई जातिगत भेदभाव नहीं था यहा ठिकाणे की रानियां महल में आई नंगारची समाज की महिलाओं का राजपूति शैली में चरण वन्दना करती थी तो जलझुलनी एकादशी पर समस्त समाज की रामरेवाडिया राजमहल में एकत्रित होकर एक साथ सरवस झुलने जाती है जिसमें नगर के मुख्य आराध्य गोपाल राय मन्दिर की रैवाडी पीछे रहती है । मन्दिर स्थापत्य कला पर ओझा ने कहा कि विश्व का एकमात्र मन्दिर है जहां बालस्वरूप प्रतिमा में भगवान राम ओर गोपाल के दर्शन होते है तो मन्दिर की ध्वजा बरसात का भी पूर्वानुमान बताती है । राजपरिवार अपने दिन की शुरुआत ठाकुर जी के दर्शन से करते तो रात में दर्शन करके ही विश्राम करते। ओझा ने भावुक होते हुए ठाकुर जी को याद कर कहा कि जहां ठाकुरजी साक्षात विराजे वह धरती वन्दनीय है वहां कोई छोटा बड़ा नहीं। डा. ओझा ने कहा कि नगर में तब अद्भुत सौहार्दपूर्ण वातावरण था कि मोहर्रम के दिन गमी में हिन्दू परिवार मुस्लिम परिवारों में गुड ओर रोटी भेजते थे जो अनोखा उदाहरण है।
शानदार महलों के निर्माण में मजदूरों को मजदूरी में अनाज तोलकर दिया जाता था । ओझा ने कहा कि मैं प्रमाण के साथ कहता हूं कि कानोड तो देव भूमि है जहां ठाकुरजी साक्षात विराजे है यहा कभी किसी का शोषण नहीं हुआ न किसी से बेगारी करवाई गई। ओझा ने प्रमाण सहित कहा कि महान अकबर कभी नहीं हो सकता महान तो प्रताप थे जो युद्ध में विजय हुए। इतिहास चोरी पर भी ओझा ने कडे शब्दों भर्त्सना करते हुए कहा कि केवल डिग्री लेने से इतिहासकार नहीं बना जा सकता इतिहास को जीना पडता है। आजकल दुसरे के क्षोध पर कोई दुसरा गलत इतिहास लिख रहा है जो गलत है ऐसा नहीं होना चाहिए।
संगोष्ठी में राजपरिवार के ऊंकार सिंह, गिरिजा शंकर व्यास, चतुर उ.मा.विद्यालय में प्राचार्य राजेंद्र व्यास ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन वरतंतु पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर इतिहासकार डां ओझा का नागरिक अभिनंदन भी किया गया। कार्यक्रम में इतिहास प्रदर्शनी पर राजकुमार सुथार, निर्मल पुरोहित, दीपक शर्मा, शान्तनु लोहार को सम्मानित किया गया।

डेस्क/माय सर्कल न्यूज
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज

निष्पक्ष और सच खबर~ आपके पास कोई ख़बर हो तो हमारे डेस्क के नम्बर 92140-30782 पर वीडियो, फोटो समेत ख़बर भेज सकते हैं। या हमें मेल करें- mycirclenews@gmail.com यूट्यूब पर सर्च करें- माय सर्कल न्यूज़

Leave a Comment

Advertisement
लाइव क्रिकेट स्कोर