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August 25, 2026 5:23 am

अलविदा ‘विले पार्ले’ फैक्ट्री! जहाँ से शुरू हुआ Parle-G का सफर, पढ़े पूरी ख़बर

भारत के हर घर की रसोई और बचपन की यादों का हिस्सा रहा ‘Parle-G’ आज एक ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। Parle Products की नींव 1929 में मोहनलाल दयाल चौहान ने रखी थी। शुरुआत टॉफी और कैंडी से हुई, लेकिन 1939 में बिस्किट निर्माण ने इस कंपनी को घर-घर की पहचान बना दिया। विले पार्ले इलाके के नाम पर ही इस बिस्किट का नाम ‘पार्ले’ पड़ा। आज करीब 13.5 एकड़ में फैली इस जमीन के पुनर्विकास को महाराष्ट्र राज्य पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (SEIAA) ने मंजूरी दे दी है। 1939 में पहली बार यहाँ बिस्किट बने थे। हालांकि, उत्पादन लागत और लॉजिस्टिक्स के चलते यहाँ बिस्किट का निर्माण 2016 में ही रोक दिया गया था। दशकों से चर्चा थी कि पैकेट पर दिखने वाली बच्ची सुधा मूर्ति या नीरू देशपांडे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि यह किसी वास्तविक व्यक्ति का चित्र नहीं है। इसे 1960 के दशक में कलाकार मगनलाल दहिया ने ‘मासूमियत और शुद्धता’ के प्रतीक के रूप में डिजाइन किया था।

डेस्क/माय सर्कल न्यूज
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज

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