चित्तौड़गढ़। राजस्थान सरकार के पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत ने कहा कि राज्य की भजनलाल सरकार द्वारा विश्व सामाजिक न्याय दिवस पर पैंशन धरियो को मिलने वाली राशि में कटौती कर अन्याय किया है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में 1250 मिलने वाली पेंशन पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार ने पेंशनधारियों को राहत प्रदान की थी बजट घोषणा के सर्कुलर के आधार पर वृद्ध महिला पुरुष, विधवा महिला, दिव्यांग (विकलांग) की पेंशन हर वर्ष 15% बढ़कर खाते में आनी थी राज्य के भजनलाल सरकार ने प्रथम वर्ष तो 1000 से 15% प्रतिशत बढ़ाकर 1150 रुपये कर दी अगले वर्ष पेंशन राशि 1325 करने के बजाय 1250 रखी थी वर्तमान में 1500 रुपये पेंशन करने के बजाय 1250 से मात्र 50 रुपये बढ़ाकर 1300 रुपये की गई है पेंशन राशि में 200 रुपये की कटौती करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सामाजिक न्याय नहीं पेंशनधारियों के साथ अन्याय किया है जबकि इन पेंशनधारियों का खर्च भी इसी राशि से चलता है।
उन्होंने कहा कि आरटीई के दायरे में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य के साथ भी राज्य सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है वर्तमान में 900 करोड़ रुपये बकाया होने से इस दायरे में आने वाले बच्चों को एडमिशन लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ेगा भाजपा सरकार केवल अडानी अंबानी को फायदा देती है जब आमजन के हित की योजनाओं में कटौती करेंगे।
राज्य सरकार ने RGHS में बुजुर्गों के लिए सख्त नियम बना दिये है उन्हें उच्च क्वॉलिटी की दवाई मिलना बंद हो गई है नियमों की कतार में खड़ा होने को मजबूर है ओपीडी के लिए अनिवार्य लाइव फोटो और फिंगरप्रिंट प्रक्रिया, से बुजुर्ग पेंशनर्स काफी परेशान हैं। चलने-फिरने में असमर्थ, गंभीर रूप से बीमार या दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्गों को वेरिफिकेशन के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। साथ ही, दवा की दुकानों पर लंबी कतारें, दवाओं की कमी और ऑनलाइन तकनीकी दिक्कतों के कारण भी वे दर-दर भटकने को मजबूर हैं यह सभी समाजिक न्याय के मुद्दे है जिस पर माननीय मुख्यमंत्री को संज्ञान लेना चाहिए।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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