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February 28, 2026 4:31 am

विधायक कृपलानी ने आयुक्त को ठेके पर सौंपी नगर परिषद, जनता अपने काम करवाने को भटक रही- आंजना

◆विधानसभा में निम्बाहेड़ा नगर परिषद में फैले भ्रष्टाचार के मायाजाल की आवाज उठने से क्षेत्र हुआ देश प्रदेश में शर्मसार : आंजना

चित्तौड़गढ़। निम्बाहेड़ा नगर परिषद में राजनेताओं एवं अधिकारियों के अनैतिक रसूख से फैलते भ्रष्टाचार का मायाजाल अब क्षेत्र को शर्मसार कर रहा है। दो दिन पहले ही यह मामला विधानसभा में उठा हैं। जहां धौलपुर जिले के राजाखेड़ा विधायक रोहित बोहरा ने साक्ष सहित विधानसभा में आवाज उठाई कि कैसे निंबाहेड़ा नगर परिषद में जनता के धन का दुरुपयोग किया जा रहा है और उस पैसे से नेताओं एवं अधिकारियों के घर भरे जा रहे हैं। विधानसभा में मामला उठने के बाद चित्तौड़गढ़ की राजनीति में उबाल आ गया हैं। पूर्व सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने कहा कि पिछले डेढ़ साल में निंबाहेड़ा नगर परिषद में भ्रष्टाचार का एक ऐसा तंत्र विकसित हुआ है जिससे ठेकेदार तो परेशान है, ही साथ ही वह ईमानदार अधिकारी एवं कर्मचारी भी पीड़ित महसूस कर रहे हैं जो भाजपा नेताओं एवं नगर परिषद आयुक्त एवं प्रशासक का इस भ्रष्टाचार में साथ नहीं दे रहे हैं ऐसे अधिकारियों एवं कर्मचारियों को या तो ट्रांसफर किया जा रहा है या उन्हें अपने विभाग से हटा कर अन्य कमजोर विभागों में लगाया जा रहा है ताकि उनके भ्रष्टाचार की पोल ना खुले। आंजना ने कहा कि जनता ने देखा है कि कैसे राष्ट्रीय दशहरा मेला 2025 एवं निर्माण विभाग सहित स्टोर शाखा द्वारा लगाए गए टेंडर में भाजपा नेताओं एवं नगर परिषद आयुक्त ने नियमों के विपरीत जाते हुए करोड़ों रुपए के टेंडर लगे जिसमें कहीं खामियां हैं परंतु उन खामियों को नजरअंदाज करते हुए टेंडर आवंटित कर दिए गए, जिसमें करोड़ों रुपए का खुला भ्रष्टाचार हुआ है जिसकी शिकायत पूर्व में कांग्रेस पार्टी द्वारा 2 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित प्रदेश के मुख्यमंत्री स्वायत्त शासन मंत्री चित्तौड़गढ़ जिला कलेक्टर एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को की गई थी परंतु कोई कार्रवाई न होने पर सत्ताधारी भाजपा नेताओं एवं नगर परिषद आयुक्त के हौसले बुलंद होते गए एवं उन्होंने इसे सरकारी धन को लूटने का लाइसेंस मान लिया है। पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष सुभाषचंद्र शारदा ने बताया कि नगर परिषद द्वारा अगस्त 2025 में डामरीकरण के टेंडर बिना किसी अन्य शर्तों के लगाए गए थे जिससे टेंडर कंपटीशन के आधार पर हुए और ठेकेदार द्वारा 32% बिलों पर कार्य दिया गया, उसके बाद अक्टूबर 2025 में पुनः डामरीकरण के टेंडर आमंत्रित किये गये जिसमें कार्य 15% बिलो की दर पर आवंटित हुआ परंतु नगर परिषद द्वारा नवंबर 2025 में लगभग 15 करोड़ रुपए की लागत से डामरीकरण का टेंडर आमंत्रित किया गया जिसमें आरटीपीपी एक्ट के विपरीत अन्य शर्तें लगाई गई जिससे केवल बबलू कंस्ट्रक्शन एवं अंकिता कंस्ट्रक्शन नाम की फर्म ही इस टेंडर में भाग लेने हेतु पात्र हो पाई एवं यह टेंडर बीएसआर दर पर आवंटित हुआ मतलब चार माह में ही 32% लागत का फर्क डामरीकरण के टेंडर में आ गया जिससे नगर परिषद को 4.50 करोड रुपए का स्पष्ट नुकसान होता दिखाई दे रहा है। साथ ही उक्त डामरीकरण टेंडर की राशि को पूरा करने के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा सही बनी हुई सड़कों को भी खुरच एवं तोड़कर पुनः बनाया जा रहा है जिससे भाजपा नेताओं एवं अधिकारियों द्वारा किए जा रहे संगठित भ्रष्टाचार की धारणा आम जनता में और मजबूत हो रही है। नगर परिषद द्वारा दशहरा मेले में फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी का एक टेंडर आमंत्रित किया गया था जो 20 लाख रुपए का था परंतु उसमें कोई शर्तें ना होने की वजह से यह टेंडर कंपटीशन के आधार पर हुआ जो निर्धारित दर से 71% बिलों पर आवंटित हुआ परंतु नगर परिषद आयुक्त का खेल देखिए जहां संबंधित फर्म को केवल 580000 रुपये का भुगतान होना था उसकी जगह उस फर्म को लगभग 17 लाख रुपए का भुगतान किया गया जो किसी भी तरह से नियमों के अंतर्गत नहीं आता है परंतु चूंकि उक्त फर्म का मालिक विक्रम कुमावत स्थानीय विधायक एवं भाजपा के लिए निशुल्क फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी करता है एवं उनके कार्यक्रमों की रील बनता है इसलिए इस फर्म को अनैतिक लाभ देने की दृष्टि से नगर परिषद आयुक्त एवं प्रशासक द्वारा टेंडर राशि से लगभग 300% भुगतान किया गया जो जन धन की खुली लूट है।

नगर नगर कांग्रेस अध्यक्ष बंशीलाल राईवाल ने बताया कि नगर परिषद में निर्माण स्टोर एवं भूमि शाखा में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायत है हमें पिछले डेढ़ वर्ष से लगातार मिल रही है जिसकी लिखित शिकायत हमारे द्वारा एवं स्थानीय ठेकेदारों सहित अन्य जागरूक नागरिकों द्वारा मुख्यमंत्री सहित अन्य सक्षम जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को की जाती रही है परंतु इस पर कोई उचित कार्रवाई न होने से नगर परिषद आयुक्त सहित भाजपा नेताओं के हौसले बुलंद हुए हैं जिससे इन्होंने इस जनधन की लूट का लाइसेंस मान लिया है इसकी एक बानगी सुभाष चौक सब्जी मंडी के नवीन द्वार निर्माण के टेंडर में भी देखने को मिला जहां पूर्व में नगर परिषद द्वारा 36 लाख रुपए की लागत से उक्त द्वार के पुनर्निर्माण का टेंडर आमंत्रित किया गया जिसे नगर परिषद आयुक्त की चहेती फर्म को दिया गया परंतु कुछ समय बाद फर्म ने यह कार्य करने से मना कर दिया फिर यही टेंडर 45 लाख रुपए की लागत से कार्य करने हेतु निकल गया जिससे 20% अधिक दर पर आवंटित करते हुए 54 लाख रुपए में द्वार निर्माण का टेंडर पुनः दिया गया जिससे नगर परिषद को 18 लाख रुपए का सीधा नुकसान होता दिखाई दे रहा है जबकि नियम यह है कि कोई भी फर्म यदि टेंडर आवंटित होने के बाद काम करने से मना करती है तो उसकी अमानत राशि जप्त की जाती है एवं उसे फर्म को अग्रिम टेंडर में भाग लेने हेतु डीबार्ड कर दिया जाता है परंतु चूंकि उक्त फर्म नगर परिषद आयुक्त की निजी फर्म की तरह ही है जिसे वह नाथद्वारा एवं निम्बाहेड़ा नगर परिषद में लगातार पोषित कर रहे हैं इसलिए इस फर्म के साथ नियमों के विपरीत जाते हुए करोड़ों रुपए के टेंडर दिए जा रहे हैं जो राजस्थान में सबसे अधिक दरों पर है। बंशीलाल राईवाल ने बताया कि नगर परिषद क्षेत्र में महापुरुषों की मूर्तियां नियमों के विपरीत लगाई जा रही है क्योंकि स्थानीय निकाय विभाग में मूर्तियां स्थापित करने का कोई टेंडर नहीं होता है। पूर्व में नगर परिषद क्षेत्र में कांग्रेस द्वारा इंदिरा गांधी, राजीव गांधी एवं भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु की मूर्ति स्थापित की गई थी जिसे कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा आपसी सहयोग से राशि एकत्रित कर स्थापित किया गया था, साथ ही दांडी यात्रा स्मारक पर स्थापित कि गई मूर्तियों की कुल लागत 35 लाख रुपए आई थी परंतु बीजेपी नेताओं द्वारा अपनी जेब में भरने की नीयत से प्रशासक कार्यकाल में क्षेत्र में महापुरुषों की मूर्तियां स्थापित की जा रही है जो नॉन बीएसआर आइटम है इन अष्टधातु की मूर्तियां जयपुर विकास प्राधिकरण में महाराणा प्रताप चेतक एवं एक अन्य मूर्ति 1200 रु प्रति किलो के आधार पर ही स्थापित हुई है परंतु शायद निम्बाहेड़ा नगर परिषद क्षेत्र जयपुर से अधिक महंगा है इसलिए यहां यही मूर्तियां 2600 प्रति किलो के आधार पर स्थापित की जा रही है जिससे 1400 रु प्रति किलो के आधार पर लगभग हर मूर्ति में 28 लाख रुपए से ज्यादा का भ्रष्टाचार स्पष्ट दिखाई दे रहा है क्योंकि प्रत्येक मूर्ति 2000 किलो की है। अन्य जानकार ठेकेदारों ने तो यह भी बताया कि मूर्तियों के वज़न में भी घालमेल है एवं प्रतिमूर्ति 150 से 200 किलो का वजन भी कम है इससे लागत राशि में लगभग 28 लाख रुपए की लूट के साथ-साथ प्रतिमूर्ति लगभग 50 लाख रुपये वजन में और लूटे जा रहे हैं जो लज्जित करने वाला है कि जिन महापुरुषों से प्रेरणा लेने के लिए यह मूर्तियां स्थापित की जा रही है उनके नाम पर भी करोड़ों रुपए का गाल मेल किया जा रहा है।

पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष Iपरवेज अहमद शिब्बी ने बताया कि नगर परिषद की स्टोर शाखा में भी जो निविदाएं आमंत्रित की जा रही है वे पूरी तरह से भाजपा नेताओं का पेट भरने के लिए ही आमंत्रित की जा रही है क्योंकि यदि हम निविदाओं को देखेंगे तो वह बीएसआर से ऊपर आमंत्रित की जा रही है जिसमें प्रत्येक टेंडर में केवल एक से दो फर्में ही भाग ले रही है जबकि यदि नियमों से निविदाएं आमंत्रित की जाती तो निम्बाहेड़ा शहर में ही कम से कम 20 संविदाकर्मी हैं जो हमेशा नगर परिषद की टेंडर प्रक्रिया में भाग लेते रहे हैं। नगर परिषद द्वारा समय-समय पर श्रमिक मुहैया कराने के नाम पर लाखों करोड़ों रुपए के टेंडर आमंत्रित किया जा रहे हैं जबकि राज्य सरकार द्वारा शहरी नरेगा योजना जारी है जिसके तहत श्रमिकों को सफाई व्यवस्था सहित अन्य कार्यों में लगाया जा सकता है परंतु नगर परिषद आयुक्त शायद सरकार से ऊपर हैं इसलिए वह समय-समय पर 50 लाख रूपये 80 लाख रूपये एवं एक करोड रुपए के टेंडर केवल श्रमिक उपलब्ध कराने के नाम पर लगाते रहे हैं लेकिन यह श्रमिक कहां और क्या काम कर रहे हैं यह शायद स्थानीय उपखंड अधिकारी जो नगर परिषद के प्रशासक हैं उन्हें भी नहीं पता उन्हें तो स्थानीय विधायक ने इस तरह दबाया हुआ है कि आपको केवल नगर परिषद से आने वाली प्रत्येक फाइल पर हस्ताक्षर करने हैं एवं अपनी आंखें बंद रखनी है इसलिए एक मजबूत अधिकारी होने के बावजूद भी आंखें मूंद कर बैठे हैं साथ ही निंबाहेड़ा नगर परिषद में चल रही लूट की जानकारी चित्तौड़गढ़ जिला कलेक्टर, संभागीय आयुक्त सहित प्रदेश के मुख्य सचिव एवं मुख्यमंत्री तक है परंतु कोई भी नेता एवं अधिकारी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है जिससे इन लुटेरों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।

पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष सुभाषचंद्र शारदा ने बताया कि हमारे कार्यकाल में नगर परिषद क्षेत्र में घर-घर कचरा संग्रहण करने हेतु लगभग एक करोड़ 40 लाख रुपए के लागत से टेंडर आवंटित किया गया था परंतु हमारा कार्यकाल पूर्ण होने के बाद नगर परिषद क्षेत्र मे आठ गांवों और शामिल हुए जिसको आधार बनाकर नगर परिषद आयुक्त ने 5 करोड रुपए की लागत से घर-घर कचरा संग्रहण करने का टेंडर जारी किया जिस पर हमारा द्वारा आपत्ति करने पर सक्षम अधिकारियों ने हस्ताक्षर नहीं किया और यह टेंडर अधर जुल्म लटक गया परंतु नगर परिषद आयुक्त तब छोटे-छोटे टेंडर के माध्यम से भ्रष्टाचार करने में लगे हुए हैं साथ ही रात्रि कालीन सफाई के नाम पर 50 लाख रुपए का एक टेंडर नगर परिषद आयुक्त द्वारा जारी किया गया है जबकि कांग्रेस कार्यकाल में नगर पालिका के स्थाई सफाई कर्मचारी एवं श्रमिक यह रात्रि कालीन सफाई का कार्य पूरी निष्ठा से करते थे जिससे शहर राजस्थान सहित उत्तर भारत में द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर स्वच्छता सर्वेक्षण में रहा जैसे क्षेत्र का गौरव बड़ा परंतु जब से कांग्रेस का बोर्ड समाप्त हुआ है।नगर परिषद आयुक्त स्वयं को सरकार से ऊपर मानने लगे हैं ना तो वह आम जनता से मिलते हैं और ना ही किसी आम नागरिक का फोन उठाते हैं एवं यदि कोई व्यक्ति बार-बार जाकर उनसे अपना कार्य करने हेतु संपर्क करता है तो वह किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से संदेश पहुंचते हैं कि आप जाकर भाजपा कार्यालय पर मिलो वहां से निर्देश आने पर ही आपका काम होगा जो अनैतिक है। नगर परिषद आयुक्त ने संविधान की शपथ ली है ना कि भाजपा के सदस्य के रूप में कार्य करने हेतु भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है यदि उन्हें यही कार्य करना है तो वह अपने पद से इस्तीफा देकर भाजपा के सदस्य बन जाए परंतु लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए भाजपा एवं विधायक कार्यालय की तरफ दौड़ना कहां तक उचित है।

निम्बाहेड़ा ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष सम्पत धाकड़ ने कहा कि नगर परिषद में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायतें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित मुख्यमंत्री एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में है परंतु एक अदृश्य शक्ति नगर परिषद आयुक्त को संरक्षित किए हुए हैं एवं वह शक्ति स्थानीय विधायक कृपलानी ही हो सकते हैं क्योंकि उनके क्षेत्र में अगर करोड़ों रुपए की लूट एक अधिकारी कर रहा है तो शायद उसका कुछ ना कुछ लाभ उन्हें भी निजी रूप से हो रहा होगा इसलिए वह भी अपनी आंख मूंद कर बैठे हैं जिससे आम जनता के साथ-साथ भाजपा नेता एवं कार्यकर्ता भी पीड़ित है जो समय-समय पर हमसे संपर्क करके क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार की जानकारी उन्हें देते रहते हैं। जानकारी में तो यहां तक आया है कि राजस्व गांव रानीखेड़ा जो पूर्व में ग्राम पंचायत था वहां कुछ ऐसे कार्य नगर परिषद द्वारा किए जा रहे हैं जिन्हें पूर्व में ग्राम पंचायत द्वारा बिल पास करते हुए भुगतान भी उठा लिया गया है जिसकी शिकायत भी मुख्यमंत्री तक पहुंची है जिसकी प्रतिलिपि कांग्रेस कार्यालय में भी प्राप्त हुई है। जब ग्राम पंचायत रानीखेड़ा ने उक्त कार्यों का भुगतान उठा लिया तो अब नगर परिषद किस आधार पर वही निर्माण कार्य स्वयं के खर्चे से कर रही है। इसी क्रम में नगर परिषद द्वारा इस गणतंत्र दिवस पर लगभग 60 क्विंटल लड्डू का 24 लाख रु से अधिक का भुगतान संवेदक को किया गया जबकि कांग्रेस शासन में यह 36 क्विंटल लड्डू होकर भुगतान 10 लाख रु ही था। इस हेतु जब पत्रकारों ने आयुक्त से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि क्योंकि नगर परिषद का क्षेत्र बढ़ा है तो लड्डू का वितरण भी बढ़ेगा जबकि नगर परिषद क्षेत्र में केवल 15000 के आसपास की आबादी बढ़ी है जिसमें से स्कूल जाने वाले विद्यार्थी 3000 से भी कम होंगे लेकिन भ्रष्टाचार करने के लिए इन्होंने बच्चों के लड्डू को भी नहीं छोड़ा एवं बच्चों को सरस घी से बने लड्डू खिलाने की जगह डालडा घी एवं सोयाबीन के तेल में नुक्ति तलकर लड्डू बच्चों को वितरित कर दिए।

ब्लॉक कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष भोपराज टांक ने कहा कि नगर परिषद द्वारा 80 लख रुपए के लागत से क्षेत्र में कुत्ते पड़कर उनकी नसबंदी करने का टेंडर निकाला गया है जो भी भ्रष्टाचार का एक बड़ा उदाहरण है क्योंकि टेंडर निविदा राशि से अधिक के दर पर आवंटित किया गया है जिसमें नियमों की धज्जियां उड़ाई गई है साथ ही उक्त समय तक संवेदक द्वारा जो शेल्टर होम बनाया गया है वहां भी किस तरह से काम किया जा रहा है यह ना तो जनता समझ पा रही है और ना ही कोई अधिकारी। टेंडर हो जाने के बावजूद क्षेत्र में आवारा कुत्तों की समस्या ना सिर्फ जस की तस बनी हुई है बल्कि विकराल भी होती जा रही है। अब जब मीडिया एवं विधानसभा में निम्बाहेड़ा नगर परिषद के भ्रष्टाचार की खबरें सामने आने लगी है तो अब देखना यह है कि विधानसभा में निम्बाहेड़ा नगर परिषद के भ्रष्टाचार की आवाज उठने के बाद मुख्यमंत्री, स्वायत्त शासन मंत्री सहित स्थानीय विधायक कृपलानी एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो क्या कार्यवाही करता है एवं यदि नगर परिषद में व्याप्त भ्रष्टाचार पर कोई कार्यवाही नहीं हुई तो यह समझ लिया जाए कि उक्त भ्रष्टाचार को स्थानीय विधायक कृपलानी सहित मुख्यमंत्री का संरक्षण प्राप्त है। अगर सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए कोई सख्त कदम नहीं उठाया तो कांग्रेस पार्टी जोरदार विरोध प्रदर्शन कर जनता की आवाज उठाएगी।

डेस्क/माय सर्कल न्यूज
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज

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