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March 18, 2026 1:53 am

उच्च न्यायालय के आदेश के बाद हाइवे पर 75 मीटर तक के दायरे में आने वाले निर्माण हटेंगे

चित्तौड़गढ़, (सलमान)। प्रदेश के नेशनल हाईवे किनारे अब बुलडोजर का एक्शन दिखने वाला है। राजस्थान हाईकोर्ट के सख्त निर्देश के बाद प्रदेश सरकार ने कमर कस ली है। हाईवे के सेंटर पॉइंट से 75 मीटर के दायरे में आने वाले सभी ढाबे, होटल और दुकानों को हटाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। दरअसल, पिछले दिनों राजस्थान हाईकोर्ट ने हिम्मत सिंह गहलोत बनाम राजस्थान सरकार मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि हाईवे के किनारे बेतरतीब और निर्माणों की वजह से सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। कोर्ट का कहना है कि सेफ्टी ओवर प्रॉपर्टी यानी लोगों की जान की कीमत किसी भी अवैध निर्माण से कहीं ज्यादा है। नेशनल हाईवे के सेंटर पॉइंट से 75 मीटर तक कोई भी कमर्शियल या रेजिडेंशियल निर्माण मान्य नहीं होगा। सबसे बड़ी बात यह है कि अगर किसी नगर निकाय या पंचायत ने इस दायरे में निर्माण की अनुमति दी भी है, तो हाईवे नियमों के उल्लंघन के कारण उसे अमान्य माना जाएगा।
राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद अब हाईवे के किनारे स्थित होटलों, ढाबों, व्यवसायिक निर्माणकर्ताओं में खलबली मच गई है। वहीं सड़क के किनारे प्लॉट खरीदने वालों को भी चेतावनी दे दी गई है। इस महत्वपूर्ण निर्णय के बाद अब राजस्थान ने भी प्रदेश के सभी जिला कलक्टरों को विभिन्न मार्गों पर सर्वे कराकर आदेश की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिये है। अब इस निर्देश के बाद राजमार्गों पर केन्द्र बिन्दू से 75 मीटर अर्थात 246 फीट के बाद ही कोई निर्माण ही किया जा सकेगा। इस निर्णय की अनुपालना में चित्तौड़गढ़ जिला कलक्टर आलोक रंजन ने राष्ट्रीय राजमार्ग उदयपुर, प्राधिकरण के परियोजना निर्देशक अधिशाषी अभियंता पीडब्ल्यूडी और एनएच बांसवाड़ा को संयोजक नियुक्त किया है। वहीं इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता, उपखंड।अधिकारी, तहसीलदार, सहायक अभियंता और पुलिस अधिकारी सदस्य बनाया गया है जो क्षेत्र का सर्वे कर कमेटी को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे और उस रिपोर्ट के आधार पर निर्णय के अनुपालना की जायेगी। राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद जहां प्रदेश के कई क्षेत्रों में हाइवे किनारों के होटलों, ढाबों और आवासीय सहित व्यवसायिक निर्माणों को हटाने की कार्यवाही शुरु हो गई है। वहीं चित्तौड़गढ़ जिले के विभिन्न हाइवे पर सर्वे करने के लिए तकनीकी टीम नियुक्त की गई है जिसमें इंजिनियर, पीडब्ल्यूडी के अधिकारी और अन्य कार्मिकों ने काम शुरु कर दिया है। आगामी दिनों में जिला कलक्टर की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत की जायेगी। राजस्थान उच्च न्यायालय के बाद जहां नेशनल और स्टेट हाइवे पर 75 मीटर, एमडीआर (मुख्य जिला सड़क) सड़कों पर 50 मीटर, ओडीआर (अन्य जिला सड़क) सड़कों पर 17.5 मीटर और ग्रामीण सड़कों पर केन्द्र बिन्दू से दोनों ओर 15 मीटर छोड़ना होगा। अब इन क्षेत्रों में सरकार ने भूमि रूपान्तरण पर भी रोक लगा दी है। हाइवे किनारे पर प्लॉट खरीदने से पहले पूरा रिकॉर्ड की जांच कर ही भूमि आदि की खरीददारी करें। अन्यथा आने वाले समय में उन्हें परेशानी उठानी पड़ सकती है। इस बारे में चित्तौड़गढ़ जिला कलक्टर आलोक रंजन ने बताया कि उच्च न्यायायल के आदेश के बाद राजस्थान सरकार से प्राप्त निर्देशों से एनएच के परियोजना निदेशक के संयोजन में कमेटी का गठन किया गया है। जिसकी रिपोर्ट आने पर नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी।

डेस्क/माय सर्कल न्यूज
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज

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