
बेगूं। पारसोली के समीप खेरपुरा गांव में धार्मिक माहौल के बीच श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन मंगलवार 14 अप्रैल 2026 से प्रारंभ हो गया। यह सात दिवसीय कथा सोमवार, 20 अप्रैल 2026 तक प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक एनएच-27 चित्तौड़-कोटा हाईवे स्थित कथा स्थल पर आयोजित की जा रही है।
कथा के एक दिन पूर्व दिन मे पारसोली से खेरपुरा तक नृसिंह द्वारा भव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में महिला पुरुष श्रद्धालुओं ने भाग लिया। शोभायात्रा में श्रद्धालु सिर पर कलश धारण कर भजन कीर्तन करते हुए आगे बढ़े, जिससे पूरे मार्ग पर भक्तिमय वातावरण बना रहा।
कथा व्यास के रूप में गेहूं खेड़ी के प्रसिद्ध संत प्रेमनारायण जी महाराज श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा का रसपान करा रहे हैं। आयोजन समिति के अनुसार कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का वर्णन किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान के साथ जीवन में सदाचार और भक्ति का संदेश मिलेगा।
कार्यक्रम के अंतर्गत 17 अप्रैल शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा, जिसमें विशेष झांकी, भजन संध्या और प्रसादी वितरण का आयोजन होगा। वहीं 20 अप्रैल, सोमवार को पूर्णाहुति के साथ कथा का समापन किया जाएगा।
आयोजन में भगवान श्री सत्यनारायण जी को संरक्षक के रूप में स्थापित किया गया है। आयोजकों ने क्षेत्र के समस्त श्रद्धालुओं से सपरिवार कथा में भाग लेकर सत्संग, सेवा, दर्शन और जाप के माध्यम से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने का आह्वान किया है। इस धार्मिक आयोजन को लेकर खेरपुरा पारसोली क्षेत्र में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। कथा स्थल पर व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए स्वयंसेवकों की टीम भी सक्रिय रूप से सेवाएं दे रही है।
हरि स्मृति ही है जीवन की असली पूंजी
कथा के प्रथम सोपान में व्यास पीठ पर विराजमान गेहूं खेड़ी के प्रसिद्ध संत प्रेमनारायण जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भागवत कथा के गूढ़ रहस्यों का रसपान कराया। गुरुदेव ने हरि स्मरण की महिमा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए जीवन के कई अहम संदेश दिए
सच्ची कमाई
मनुष्य जीवन की सबसे बड़ी और वास्तविक कमाई धन-संपत्ति नहीं, बल्कि हरि स्मृति (भगवान की निरंतर याद) है। जीवन की हर परिस्थिति में ईश्वर को न भूलना ही मनुष्य की सबसे बड़ी सफलता है।
सच्चा साधक
जो व्यक्ति सुख-दुख, लाभ-हानि और मान-अपमान में समभाव रखकर भगवान का स्मरण बनाए रखे, वही सच्चा साधक है।
भक्ति सबके लिए सुलभ
दान-पुण्य करने के लिए भौतिक साधन और सामर्थ्य चाहिए, जो सबके पास नहीं होता। लेकिन भगवान का स्मरण हर साधनहीन और संपन्न व्यक्ति कर सकता है। इसके लिए केवल सच्चे प्रेम और श्रद्धा की दरकार है।
प्रभु को ही अपनाएं
भगवान से सांसारिक वस्तुएं मांगने के बजाय भगवान को ही अपना लक्ष्य बना लेना चाहिए। प्रभु को पा लेने पर संसार की सभी इच्छाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं।
महाराज जी ने उपस्थित लोगों को आत्ममंथन करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि हमें सोचना चाहिए कि 24 घंटे में हम कितना समय भगवान को देते हैं और कितना संसार में खोए रहते हैं। यदि पूरे दिन में केवल चार मिनट भी सच्चे मन से ईश्वर को याद कर लिया जाए, तो जीवन सार्थक हो सकता है।
कथा के आगामी मुख्य कार्यक्रम
भगवान श्री सत्यनारायण जी के संरक्षण में आयोजित यह कथा 20 अप्रैल तक प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक चलेगी। 17 अप्रैल शुक्रवार को कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव अत्यंत धूमधाम से मनाया जाएगा। इस अवसर पर मनमोहक झांकियां सजाई जाएंगी और भजन संध्या व महाप्रसादी का आयोजन होगा। 20 अप्रैल सोमवार को पूर्णाहुति और हवन के साथ सात दिवसीय इस भव्य कथा का विधिवत समापन होगा।