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July 11, 2026 11:52 pm

चित्तौड़गढ़ में प्री-मानसून की मेहरबानी: लक्ष्य की 35 फीसदी बुआई पूरी, सोयाबीन छोड़ मूंगफली की तरफ बढ़ा किसानों का रुझान

चित्तौड़गढ़, (माय सर्कल न्यूज, सलमान)। चित्तौड़गढ़ जिले में मानसून से पहले हुई दमदार प्री-मानसून बारिश से खरीफ सीजन की 35 फीसदी बुआई पूरी हो चुकी है। इस बार किसान सोयाबीन की जगह मूंगफली को तवज्जो दे रहे हैं। इस बार मानसून के आने से पहले ही चित्तौड़गढ़ के खेतों में रौनक लौट आई है। वजह है- इस साल हुई दमदार प्री-मानसून बारिश। हालात ये हैं कि जिले में कृषि विभाग के कुल लक्ष्य का करीब 35 फीसदी बुआई का काम सिर्फ प्री-मानसून के दौर में ही पूरा हो चुका है। राजस्थान में अमूमन मानसून जून के आखिरी दिनों में दस्तक देता है, जिसके बाद ही किसान खेतों का रुख करते हैं। लेकिन इस बार प्री-मानसून की मेहरबानी ने पूरी तस्वीर बदल दी है। जून के महीने में जिले में सामान्य से कहीं बेहतर, यानी 122 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) के डॉक्टर शंकर लाल जाट ने बताया कि इस सीजन के लिए जिले में कुल 3 लाख 20 हजार 630 हेक्टेयर में बुआई का लक्ष्य रखा था। प्री-मानसून की अच्छी बारिश के चलते रिकॉर्ड एक लाख 8 हजार हेक्टेयर में बुआई का काम प्री मानसून की बारिश में ही पूरा हो गया है।

जिले में खरीफ फसल बुआई का आंकड़ा

चित्तौड़गढ़ का किसान अब पारंपरिक रूप से बोई जाने वाली सोयाबीन से धीरे-धीरे दूरी बना रहा है। इस बार किसानों का सबसे ज्यादा रुझान मूंगफली की खेती की तरफ देखा जा रहा है। यही वजह है कि प्री-मानसून के शुरुआती दौर में ही 32 हजार 695 हेक्टेयर भूमि पर मूंगफली बोई जा चुकी है। इस अगेती बुआई का असर अब खेतों में साफ दिखने लगा है। मक्का और मूंगफली की फसलें 15 से 25 दिन की हो चुकी हैं और खेतों में निराई-गुड़ाई का काम लगभग पूरा हो गया है।

एक तरफ किसान खेतों में पसीना बहा रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासन भी मुस्तैद है। खरीफ फसलों के लिए खाद की किल्लत न हो, इसके लिए समय से पहले ही डिमांड भेज दी गई थी।

डीएपी और यूरिया खाद की डिमांड, आपूर्ति और मौजूद उपलब्ध स्टॉक

वक्त से पहले बरसी राहत की बूंदों ने चित्तौड़गढ़ के अन्नदाता के चेहरे पर समय से पहले ही मुस्कान बिखेर दी है। सोयाबीन से मूंगफली की तरफ बढ़ता किसानों का यह कदम और प्री-मानसून की यह रफ्तार बताती है कि इस बार चित्तौड़गढ़ का किसान आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखने को तैयार है। अब किसानों को मुख्य मानसून की झमाझम बारिश का इंतजार है, ताकि बाकी बचे 65 फीसदी खेतों में भी खुशहाली की बुआई की जा सके।

डेस्क/माय सर्कल न्यूज
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज

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