
नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला लिया है। स्पेशल समरी रिवीजन यानी SIR प्रक्रिया के तहत देश भर में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 13.37 करोड़ नाम बाहर कर दिए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने के बाद उठे सवालों और चिंताओं के बीच चुनाव आयोग ने दावों और आपत्तियों को दर्ज कराने की समय सीमा बढ़ा दी है। जिन नागरिकों के नाम रिकॉर्ड में गड़बड़ी या मैपिंग न होने की वजह से सूची से कटे हैं, उनके लिए आयोग ने राहत भरे निर्देश जारी किए हैं। शनिवार को नई दिल्ली स्थित आयोग मुख्यालय में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में आम जनता और कमजोर वर्गों की सहूलियत के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। जिन मतदाताओं को रिकॉर्ड में खामियों या मैपिंग न होने के कारण नोटिस भेजे गए हैं, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) खुद उनके घर पहुंचकर जरूरी दस्तावेज जमा करेंगे। इन दस्तावेजों को चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा, जिसके बाद रीजनल इलेक्टोरल ऑफिसर अंतिम फैसला लेंगे। नाइट शेल्टरों में रहने वाले लोगों, दैनिक वेतनभोगियों, गरीबों और बेघर नागरिकों के लिए पर्याप्त संख्या में सहायता डेस्क और विशेष कैंप आयोजित किए जाएंगे। दावों और आपत्तियों को दर्ज कराने की समय सीमा बढ़ जाने से उन लोगों को अपना नाम पुन: जुड़वाने का अवसर मिलेगा जिनके नाम तकनीकी या लिपिकीय त्रुटि के कारण छूट गए थे।
चुनाव आयोग का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब आयोग के भीतर ही मतभेद की खबरों ने राजनीतिक पारे को गरमा दिया है। मीडिया रिपोर्टों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच फैसलों को लेकर असमंजस के दावे किए गए थे। इन खबरों के सामने आने के बाद कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने मोर्चा खोल दिया है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।
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Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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