जयपुर/नई दिल्ली। राजस्थान में छोटी सरकार यानी पंचायत चुनावों का इंतजार कर रहे करोड़ों ग्रामीणों और भावी उम्मीदवारों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने राज्य सरकार द्वारा की गई पंचायत परिसीमन प्रक्रिया को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही प्रदेश में चुनाव कराने की राह में आ रही आखिरी कानूनी अड़चन भी दूर हो गई है।
●सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की ग्रामीणों की याचिका
मुख्य न्यायाधीश और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने राजस्व गांव सिंहानिया और अन्य ग्रामीणों द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ताओं ने नए परिसीमन और पंचायतों के पुनर्गठन को यह कहते हुए चुनौती दी थी कि उनके गांवों को भौगोलिक रूप से दुर्गम क्षेत्रों वाली पंचायतों से जोड़ दिया गया है। नवनिर्मित पंचायतों की दूरी अधिक है, जो सड़क संपर्क और दूरी संबंधी सरकारी नियमों का उल्लंघन है।
सरकार का पक्ष – ‘प्रशासनिक सुगमता’ को प्राथमिकता
राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने मजबूती से दलील पेश की। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन केवल दूरी के आधार पर नहीं, बल्कि जनसंख्या और प्रशासनिक सुगमता के आधार पर किया गया है। इसमें जिला कलेक्टर की विस्तृत रिपोर्ट को आधार बनाया गया है। राज्य में परिसीमन की पूरी कानूनी प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 तक पूर्ण कर ली गई है।
● 15 अप्रैल 2026 तक संपन्न होंगे चुनाव
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले की पुष्टि की है, जिसमें 15 अप्रैल 2026 तक राज्य की सभी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव संपन्न कराने के निर्देश दिए गए थे। शीर्ष अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि अब परिसीमन की प्रक्रिया को दोबारा नहीं खोला जाएगा, क्योंकि इससे पूरे राज्य का चुनावी कैलेंडर प्रभावित होगा।
अदालत की विशेष टिप्पणी: “यदि किसी ग्राम पंचायत को मुख्यालय के स्थान को लेकर कोई आपत्ति है, तो वे सक्षम अधिकारी को आवेदन दे सकते हैं, लेकिन इस शिकायत के आधार पर चुनाव या परिसीमन की प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी।”
◆ अब आगे क्या? निर्वाचन आयोग हुआ सक्रिय
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
◆ वोटर लिस्ट:
आयोग ने मतदाता सूचियां तैयार करने और अपडेट करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
चुनाव कार्यक्रम: सूत्रों के अनुसार, जनवरी और फरवरी माह में मतदाता सूची का काम पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद जल्द ही चुनाव की तारीखों का ऐलान संभव है।
ट्रांसफर पर रोक: आयोग ने चुनाव ड्यूटी से जुड़े अधिकारियों के तबादलों पर भी कड़ाई से रोक लगा दी है।
◆ उम्मीदवारों में उत्साह की लहर
पिछले काफी समय से परिसीमन विवाद के कारण चुनावों में हो रही देरी से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे। अब कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद गांवों की चौपालों पर चुनावी सरगर्मियां फिर से तेज हो गई हैं।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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