चित्तौड़गढ़। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा कानून में किए गए बदलावों के विरोध में देशभर में सियासी पारा चढ़ गया है। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में आज जिला कांग्रेस कमेटी ने मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत हुंकार भरी। चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय पर कांग्रेस नेताओं ने उपवास सत्याग्रह कर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया और केंद्र सरकार पर ग्रामीण रोजगार की रीढ़ तोड़ने का आरोप लगाया। चित्तौड़गढ़ कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर सामुहिक उपवास रख सत्याग्रह किया गया। बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता और दिग्गज नेता यहाँ सत्याग्रह पर बैठे थे। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान आयोजित किया जा रहा हैं। कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रमोद सिसोदिया ने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। सिसोदिया ने कहा कि मनरेगा कानून को कमजोर करने की साजिश की जा रही है, जिसे कांग्रेस कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार मनरेगा जैसे जनहितैषी कानून को खत्म करने पर आमादा है। पीसीसी के आह्वान पर रविवार को जिला मुख्यालय पर उपवास किया है। यह गरीबों के हक की लड़ाई है। प्रदर्शन में शामिल बड़ीसादड़ी क्षेत्र के कांग्रेस नेता बद्री जाट जगपुरा ने बताया कि यह संघर्ष केवल आज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक 45 दिवसीय अभियान है। यूपीए शासनकाल में जो मनरेगा कानून बना था, उसे निरस्त करने की कोशिशों के विरोध में शनिवार से यह संग्राम शुरू हुआ है जो आगामी 25 फरवरी तक चलेगा। वहीं पूर्व मंत्री उदय लाल आंजना ने केंद्र के नए वीबी-जी राम जी कानून पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने मांग की कि इस नए कानून को तुरंत वापस लिया जाए और मनरेगा को उसके पुराने स्वरूप में बहाल किया जाए। इस दौरान पीसीसी सचिव ललित बोरीवाल, पूर्व सभापति संदीप शर्मा, कांग्रेस प्रवक्ता अहसान पठान, पारस जैन बेगू, आज़ाद पालीवाल, विजय चौहान, सुमंत सुहालका, एडवोकेट रईस खान, जसवंत आंजना समेत कई कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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