चित्तौड़गढ़। पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने केंद्र की नई अफीम नीति को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अफीम किसानों को पहले 10 आरी के पट्टे देने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अब सीपीएस पद्धति के तहत 5 आरी के पट्टे जारी करने की नीति लाकर किसानों के साथ अन्याय किया जा रहा है।
पूर्व राज्यमंत्री जाड़ावत ने कहा कि स्थानीय सांसद ने बूंद-बूंद सिंचाई योजना के अंतर्गत अफीम किसानों को 10 आरी के पट्टे पर बुवाई करने और 10 आरी के पट्टे जारी करने का भरोसा दिलाया था। सांसद के इस आश्वासन पर भरोसा कर कई अफीम काश्तकारों ने अपने खेतों में 10-10 आरी के हिसाब से फव्वारा सिंचाई व्यवस्था स्थापित करने पर भारी खर्च किया। किसानों ने अपनी जमा-पूंजी लगाई और कर्ज लेकर खेती की तैयारी की, लेकिन अब नई नीति से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
सुरेंद्र सिंह जाड़ावत, पूर्व राज्यमंत्री ने कहा कि जब किसानों को 10 आरी के पट्टे देने का भरोसा दिलाया गया था, तो अब 5 आरी के पट्टों की नीति क्यों लाई जा रही है? किसानों ने जनप्रतिनिधियों के आश्वासन पर भरोसा करके निवेश किया, तो अब उनके आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा?
जाड़ावत ने सवाल उठाया कि भाजपा के जनप्रतिनिधि किसानों को दिए अपने आश्वासन से मुकरने पर क्या जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय किसानों के हितों की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, लेकिन जब किसानों के भविष्य और उनकी मेहनत की कमाई का सवाल आता है, तो चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि अफीम की खेती इस क्षेत्र के हजारों किसानों की आजीविका से जुड़ी है। किसान पहले ही बढ़ती लागत, महंगे कृषि संसाधनों और मौसम की अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में नीति बदलकर किसानों को असमंजस में डालना उनके आर्थिक हितों के साथ खिलवाड़ है।
पूर्व राज्यमंत्री ने सरकार से मांग की है कि अफीम नीति में बदलाव करते समय किसानों की परिस्थितियों और उनके किए गए निवेश का ध्यान रखा जाए। सरकार की नीतियां किसानों को राहत दें, न कि उन्हें आर्थिक संकट में धकेलें।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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