राशमी। उपखंड मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर बनास नदी पर बना 52 गेट वाला मातृकुंडिया बांध लगातार चौथे साल भी छलका। बांध का गेज शनिवार दोपहर 1 बजे भराव क्षमता साढ़े 22 फीट के करीब पहुंचने के साथ ही जल संसाधन विभाग ने बांध का एक गेट खोल बनास नदी में पानी की निकासी शुरू कर दी। मातृकुंडिया बांध का जलस्तर शनिवार दोपहर 1 बजे साढ़े 22 फीट के पास पहुंच गया। इस पर जल संसाधन विभाग ने बांध का एक गेट 30 सेंटीमीटर खोल दिया। गेट से 400 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। बांध का गेट खोले जाने से पूर्व आमजन की सतर्कता के लिए कई बार सायरन बजाकर अलर्ट किया गया। इस दौरान बाद बांध के हाई लेवल ब्रिज पर कपासन विधायक अर्जुन लाल जीनगर ने गेट सिस्टम की पूजा अर्चना कर बांध का 47 नंबर का गेट 30 सेंटीमीटर खोल दिया। इस दौरान भाजपा राशमी मंडल अध्यक्ष सुरेश जाट,मंडल महामंत्री लालू राम वैष्णव,उपाध्यक्ष सुरेश सुवालका,राकेश नुवाल, सत्यनारायण सुखवाल, एससी मोर्चा अध्यक्ष देवेंद्र रेगर,प्रशासक गणेश पुर्बिया भीमगढ़,नारायण अहीर उपरेडा,भेरुलाल गुर्जर भालोटा की खेड़ी,जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता धीरज बेनीवाल,नारायण गाडरी,राशमी थाने से एएसआई देवीलाल गुर्जर,गिलुण्ड़ चौकी प्रभारी नारायणलाल भी उपस्थित रहे। दूसरी ओर बांध के सहायक अभियंता धीरज बेनीवाल ने बताया कि फिलहाल बांध का एक गेट 30 सेंटीमीटर खोला गया है। जिससे बनास नदी में 400 क्यूसेक पानी की निकासी हो रही है। बांध में पानी की आवक बढ़ने व घटने की स्थिति में बांध के गेट अधिक या कम किए जाएंगे।

लगातार चौथे साल भरा मातृकुंडिया बांध,शनिवार को बांध के साथ नया इतिहास जुड़ा
राशमी। मातृकुंडिया बांध के साथ लाइफ में शनिवार को लगातार चौथे साल छलकने का एक नया इतिहास जुड़ गया। इससे पहले भराव क्षमता साढ़े 22 फीट भरने पर 21 अगस्त 2022,13 जुलाई 2023 तथा 8 सितंबर 2024 को गेट खोले गए।
इन सालों में भी छलका बांध
मौजुदा डिजाइन में मातृकुंडिया बांध वर्ष 1994,1995,1996,2006,2016,2017,2019 में भी लबालब भरकर छलका। वही निर्माण के दौरान 1973 व 1983 में बनास नदी उफान पर रही।
बनास नदी के बाद मेजा फीडर में पानी छोड़ा
राशमी। क्षेत्र में स्थित मातृकुंडिया बांध के शनिवार को लबालब भरने के बाद एक गेट खोलकर बनास नदी में पानी छोड़ा गया। वहीं शाम 4 बजे भीलवाड़ा जिले में स्थित मेजा बांध को भरने के लिए मेजा फीडर में पानी छोड़ दिया गया। जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता धीरज बेनीवाल ने बताया कि नहर का गेज अभी स्थिर नहीं किया गया है। अगले दो या तीन दिन में पानी मेजा बांध में पहुंचने के बाद गेज को स्थिर कर दिया जाएगा। दूसरी ओर मेजा फीडर में पानी छोड़े जाने से क्षेत्र के किसानों में भी खुशी की लहर दौड़ गई। मेजा फीडर कई जगह पक्की तो कई जगह कच्ची बनी हुई है। नहर क्षेत्र में हरनाथपुरा,आरणी,सोमी,रेवाड़ा,सांखली व लसाडिया कला ग्राम पंचायत क्षेत्र में चरागाह एवं कृषि क्षेत्र से होकर गुजरती है। नहर करीब 4 से 6 महीने तक चलती है। जिससे उक्त पांच ग्राम पंचायत क्षेत्र के करीब डेढ़ दर्जन से भी अधिक छोटे-मोटे गांवों को फायदा पहुंचता हैं। अधिकांश जगहों पर कच्ची होने से नहर से पानी का रिसाव होकर जमीन में उतरता है। जिससे जलस्तर में काफी वृद्धि होती हैं। नहर के पानी से विशेष तौर पर रबी सीजन में फसल पिलाई में काफी मदद मिलती है। नहर में पानी छोड़े जाने से आमजन के साथ ही क्षेत्र के किसानों में हर्ष व्याप्त हैं।
नदी में पानी छोड़े जाने से एक दर्जन से अधिक एनिकट भरेंगे,बढ़ेगा जमीनी जलस्तर
राशमी। मातृकुंडिया बांध भरने के बाद शनिवार को गेट खोलकर बनास नदी में पानी छोड़ दिया गया। नदी में पानी छूटने से क्षेत्र के लोगों में हर्ष व्याप्त हैं। बांध के नीचे की ओर मातृकुंडिया,देवपुरा,गेगपुरा, राशमी,उपरेडा,सोमी,सांखली,मरमी माता,पहुॅना,ऊंचा,झाड़ी खेड़ा आदि जगहों पर बनास नदी में एनिकट कम काजव बने हुए हैं। एनिकटों के लबालब भरने से जमीनी जल स्तर बढ़ेगा। जिससे रबी की फसलों में पिलाई के लिए पानी उपलब्ध होगा। एनिकटों में पानी भरा रहने से क्षेत्र में पेयजल के लिए भी पानी उपलब्ध रहता है।
