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February 10, 2026 5:06 am

NSG द्वारा देशव्यापी आतंकवाद रोधी अभ्यास एक्सरसाइज़ गाण्डीव VII  चित्तौड़गढ़ में सफलतापूर्वक संपन्न

चित्तौड़गढ़। भारत की विशिष्ट ब्लैक कैट कमांडो इकाई राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) ने जिला पुलिस चित्तौड़गढ़, एटीएस/एसओजी राजस्थान, CISF RAPP यूनिट जोन यूनिट और जिला प्रशासन के सहयोग से 3 ,4 अक्टूबर को चार राज्यों में एक साथ व्यापक आतंकवाद-रोधी अभ्यास एक्सरसाइज़ गाण्डीव VII का सफल आयोजन किया।
इस अभूतपूर्व अभ्यास का आयोजन वाराणसी, चित्तौड़गढ़, पुणे एवं जम्मू में एकसाथ किया गया, जिसमें विभिन्न जटिल परिदृश्यों के माध्यम से देश की संकट-प्रतिक्रिया एवं समन्वय क्षमताओं का परीक्षण किया गया।


अभ्यास के अंतर्गत मुख्य परिदृश्य थे।
•चित्तौड़गढ़ में रेल्वे स्टेशन व कलेक्ट्री पर बम एवं आईईडी (विस्फोटक) खतरों का निष्प्रभावीकरण,
• मंडफिया के सांवलिया सेठ मंदिर में बंधक मुक्ति अभियान,
• रावतभाटा के NPCIL  व राणा प्रताप सागर डैम पर  रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर एवं विस्फोटक (CBRNe) खतरों पर प्रतिक्रिया, ब्लास्ट एवं बंधक मुक्ति अभियान।
  • चित्तौड़गढ़ के सैनिक स्कूल में बंधक मुक्ति अभियान।

जिला पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) ने चित्तौड़गढ़ जिले में बड़े पैमाने पर आतंकवाद विरोधी मॉक ड्रिल, “गांडिव-VII” का आयोजन किया।  यह अभ्यास रेल्वे स्टेशन, कलेक्ट्री चौराहा, सैनिक स्कूल और मंडफिया के सांवलिया जी मंदिर एवं रावतभाटा के आरएपीपी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों सहित प्रमुख स्थानों पर आयोजित किया गया। इस अभियान में विभिन्न आतंकवादी हमलों के परिदृश्यों का अनुकरण किया गया ताकि प्रतिक्रियाकर्ताओं को एक यथार्थवादी अनुभव प्रदान किया जा सके।
     गांडिव-VII का प्राथमिक लक्ष्य संभावित आतंकवादी खतरों का पूर्वानुमान लगाना और एक एकीकृत आतंकवाद संकट प्रबंधन तंत्र को सक्रिय करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं का पूर्वाभ्यास करना था। इस अभ्यास में ज़िला पुलिस चित्तौड़गढ़ ज़िला प्रशासन, एटीएस और एसओजी राजस्थान और सीआईएसएफ प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में शामिल थे, जबकि एनएसजी ने अंतिम प्रतिक्रिया इकाई के रूप में कार्य किया। इस अभ्यास ने त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रियाओं के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच सहयोग और समन्वय के महत्व को रेखांकित किया।
     सम्पूर्ण अभियान की नोडल अधिकारी एएसपी चित्तौड़गढ़ सरिता सिंह ने बताया कि इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आतंकवाद-रोधी, बंधकों को छुड़ाना, आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) विरोधी अभियान और अपहरण के बाद उच्च पदस्थ व्यक्तियों को छुड़ाना था। प्रत्येक परिदृश्य के लिए विशेष रणनीतियाँ विकसित की गईं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें वास्तविक जीवन की स्थितियों में प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।  एनएसजी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ये अभ्यास न केवल तैयारी को बढ़ाते हैं, बल्कि आपदा के दौरान प्रतिक्रियाकर्ताओं को त्वरित और अधिक सूचित निर्णय लेने में भी सक्षम बनाते हैं।
     नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय में हताहत प्रबंधन और यातायात नियंत्रण जैसी प्रमुख गतिविधियों का अभ्यास किया गया। कलेक्ट्री चौराहा और रेल्वे स्टेशन जैसे स्थानों पर बचाव अभियान तेज़ी से चलाए गए और घायलों को चिकित्सा केंद्रों तक पहुँचाया गया।
      गौरतलब हैं कि 1984 में आतंकवादी और अपहरण के खतरों को बेअसर करने के लिए सर्जिकल कमांडो ऑपरेशन करने के लिए एनएसजी को एक संघीय आतंकवाद-रोधी बल के रूप में खड़ा किया गया था। इसके पास एक विशेष दस्ता भी है जो वर्तमान में उच्च जोखिम वाले वीवीआईपी को सशस्त्र सुरक्षा कवर प्रदान करता है।

जिला पुलिस अधीक्षक  त्रिपाठी ने अभ्यास के सफल संचालन के लिए एनएसजी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि अभ्यास के दौरान सामने आए किसी भी सुझाव और चुनौतियों को भविष्य में कार्यान्वयन के लिए उच्च अधिकारियों को सूचित किया जाएगा। इस अभ्यास से आतंकवाद से संबंधित आपात स्थितियों का अधिक प्रभावी ढंग से जवाब देने और संकट के समय जनता की सुरक्षा करने की सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन की क्षमता में वृद्धि होने की उम्मीद है।

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