‘अंग्रेजों के जमाने के जेलर’ दिग्गज बॉलीवुड अभिनेता गोवर्धन असरानी का सोमवार को 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। राजस्थान के जयपुर में जन्मे असरानी ने पांच दशकों के करियर में 350 से अधिक फिल्मों में काम किया।
असरानी का जन्म 1 जनवरी 1941 को जयपुर में हुआ था। इसके बाद उन्होंने जयपुर के सेंट जेवियर्स स्कूल से पढ़ाई की थी और फिर राजस्थान कॉलेज से ग्रैजुएशन भी किया था। साल 1967 में फिल्म हरे कांच की चूड़ियां से असरानी ने बॉलीवुड में डेब्यू किया था। इसके बाद वो बॉलीवुड की फिल्मों में नजर आए और अपनी कॉमिक टाईमिंग के लिए मशहूर हुए। वो अब हमारे बीच नही रहे।
पिछले कई दशकों में गोवर्धन असरानी ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार किरदार दिए और दर्शकों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई। उनका करियर 50 साल से भी लंबा था और उन्होंने 350 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। 1970 के दशक में उनका चरम समय था, जब वे सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय किरदार वाले अभिनेता के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने ‘मेरे अपने’, ‘कोशिश’, ‘बावर्ची’, ‘परिचय’, ‘अभिमान’, ‘चुपके चुपके’, ‘छोटी सी बात’, ‘रफू चक्कर’ जैसी फिल्मों में अहम भूमिका निभाई। उनकी कॉमिक टाइमिंग और संवाद बोलने का तरीका दर्शकों को हमेशा याद रहेगा। अभिनय के अलावा असरानी ने कुछ फिल्मों में निर्देशन और कहानी लेखन भी किया। उन्होंने ‘चल मुरारी हीरो बनने’, ‘सल्लाम मेमसाब’ जैसी फिल्मों को निर्देशित किया। गुजराती सिनेमा में भी उन्होंने अपनी प्रतिभा दिखाई। हाल ही में वे ‘धमाल’ जैसी हास्य फिल्मों में भी काम करते रहे। उनका योगदान हिंदी सिनेमा में लंबे समय तक याद किया जाएगा। उनके परिवार, सहयोगियों और फैंस इस खबर से बेहद दुखी हैं।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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