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March 10, 2026 3:45 pm

किशन करेरी तालाब: जहां उतरते हैं सात समुंदर पार के मेहमान; IBA सूची में शामिल कराने की दिलचस्प कवायद

चित्तौड़गढ़, (सलमान) विरासत, ऐतिहासिक व धार्मिक पर्यटन के साथ अब चित्तौड़गढ़ जिला जलवायु और प्राकृतिक वातावरण से इको टूरिज्म में भी कदम बढ़ा रहा है। सर्दी के आगमन के साथ ही सात समंदर पार के मेहमान परिंदे मेवाड़ की आबोहवा में अठखेलिया करने पहुंच चुके है।


चित्तौड़गढ़ जिले का ऐसा ही एक गांव है किशन करेरी… जहां इन दिनों विदेशी मेहमानों परिंदों का आश्रय स्थल बन गया हैं। दरहसल किशन करेरी गांव की युवाओं की एक टीम ने पिछले 10 साल से तालाब के आसपास बड़ी संख्या में पौधरोपण किया। तालाब के आसपास हरियाली देख विदेशी परिंदों ने डेरा डालना शुरू किया। यह देख किशन करेरी गांव के युवाओं ने पक्षी व पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रीन अर्थ नेचुरल सोसायटी का गठन किया। युवाओं ने तालाब के आसपास के क्षेत्र में अवैध खनन रुकवाना, पेड़ों की अवैध कटाई रुकवाना, तालाब के आसपास स्वच्छता अभियान चलाकर और हजारों की संख्या में पेड़ लगाकर पर्यावरण संरक्षण का काम किया। पक्षियों की दृष्टि से किशन करेरी गांव का तालाब बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां पक्षियों के आवास, भोजन व सुरक्षा की दृष्टि से यह तालाब अनुकूल है जिसके चलते प्रवासी पक्षी अपना प्रवास काल यहां बिता रहे हैं।

किशन करेरी के तालाब पर अक्टूबर से लगाकर मार्च महीने तक सात समुन्दर पार से पक्षी उड़कर यहां आते हैं और इस पूरे सर्दी के मौसम के दौरान अपना प्रवास काल बिताते हैं, यहां ब्राह्मणी डक, पेलिकन रेड कस्टर्ड पोचार्ड, कॉमन पोचार्ड, बार हेडेड गूज, ग्रे लेग गूज, यूरेशियन विजन, कॉमन टील, नॉर्थन शोवलर, नॉर्थन पिंनटेल ग्रेट कस्टर्ड ग्रिब, ब्लैक टेल्ड गोडविट, गेडवाल, टुफ्टेड डक, सारस क्रेन कॉमन क्रेन ब्लैक नेक स्टोर्क, यूरेशियन स्पू्नबिल, पर्पल स्वम्फेन, स्पॉट बिल्ड डक, कोरमोरेंट, ईग्रेट कॉमन कूट, लिटिल ग्रीब, लेपविंग सहित सैकड़ों प्रजातियों के पक्षी देखे जा सकते हैं।

ग्रामीणों और प्रशासन ने की प्रयास से राजस्थान सरकार के पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा 2023 में राज्य की 44 अधिसूचित आर्द्रभूमियों (वेटलैंड) में शामिल किया गया है, जिससे यह अब एक संरक्षित पक्षी विहार बन गया है और प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण ठिकाना है, जो अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है। विदेशी परिंदों की करीब डेढ़ सौ प्रजातियां यहां पर शीत कालीन समय में डेरा डाले रहती हैं। ग्रामीणों और सोसायटी की मांग की यहां ओर डवलपमेंट करवाया जाए ताकि यहाँ आसानी से पर्यटक पहुंच सकें।
इधर जिला कलक्टर आलोक रंजन, डीएफओ राहुल झाझरिया, डूंगला एसडीएम ईश्वर लाल खटीक, निम्बाहेड़ा रेंज के रेंजर सुनील ने तालाब का जायजा लिया। इस दौरान जिला कलक्टर ने बताया कि यहां पर नरेगा और ग्राम पंचायत के काम करवाएं गए हैं। 2017 के वेटलैंड रूल्स के बाद इस जगह को वेटलैंड माना गया हैं। अब यहाँ के स्थान को आईबीएस में शामिल करने के लिए भेजा जा रहा हैं ताकि यह स्थान आईबीए IBA (Important Bird and Biodiversity Area) सूची में शामिल हो सके। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास रहेगा कि इस एरिया में ओर क्या डवलपमेंट कोय जाए ताकि यहां ज्यादा से ज्यादा बर्ड वाचर आएं। इसके अलावा इस एरिया का परिरक्षण हो जिससे यहां ज्यादा विदेशी पक्षी आएं और यहाँ ट्यूरिज्म स्पॉट बने।

ए ग्रीन अर्थ नेचुरल सोसायटी से जुड़े भैरु लाल पुरोहित समेत युवाओं ने तालाब के आसपास बड़ी संख्या में पौधरोपण किया हैं। यहां पक्षियों के संरक्षण के लिए भी युवा टीम हर समय तैयार रहती हैं। विदेशी परिंदों का कोई शिकार ना करे इसके लिए भी युवा टीम पैनी निगाहें रखते हैं। तालाब में सिंगाड़े की खेती और मछली पालन भी बंद करवा दिया हैं। यहाँ शांत वातावरण में पक्षी की कलरव गुंजायमान रहती हैं।

डेस्क/माय सर्कल न्यूज
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज

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