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March 7, 2026 11:35 am

सगाई समारोह में दूल्हे ने लौटाए टीके में रखे 11 लाख, पिता बोले-बहू ही सबसे बड़ा धन

भीलवाड़ा। राजपूत समाज में शिक्षा को बढ़ावा देने और दहेज-टीका जैसी कुप्रथाओं को समाप्त करने का प्रेरणादायक संदेश देते हुए समाज के एक परिवार ने सगाई समारोह में टीके में मिले 11 लाख 51 हजार रुपये लौटाकर अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। महज एक रुपया और श्रीफल स्वीकार किया। यह मिसाल पेश की है आरसीएम ग्रुप के जनरल मैनेजर कुंवर राजेंद्र सिंह भाटी के बेटे एडवोकेट राघवेंद्र सिंह ने। वे मूलतः ब्यावर जिले के खरवा के रहने वाले हैं। राघवेंद्र का विवाह गत दिनों श्रीमाधोपुर के नाथूसर निवासी गुमान सिंह शेखावत की बेटी पूनम कंवर के साथ राजशाही रीति-रिवाजों से हुआ। विवाह अवसर पर बेटी के पिता शेखावत ने दहेज के रूप में टीका राशि 11 लाख 51 हजार रुपये दस्तूर में रखी, किंतु दूल्हे राघवेंद्र सिंह ने केवल एक रुपया एवं श्रीफल (नारियल) ही स्वीकार कर दहेज-मुक्त विवाह का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा-समाज में व्याप्त दहेज जैसी कुप्रथा को हमें समाप्त करना होगा। इसकी पहल मैंने की है। वैसे भी टीके में मिली राशि से जिंदगी तो निकल नहीं सकती। मेरे टीके की राशि स्वीकार नहीं करने से और भी युवा दहेज विरोधी मुहिम में आगे आकर पहल करेंगे। दूल्हे के पिता कुंवर राजेंद्र सिंह भाटी ने बेटे की इस पहल को पूरी तरह समर्थन दिया। भाटी ने अपने समधी से कहा कि ‘आपने मुझे आपकी बेटी सौंपी है। हमारे लिए हमारी बहू ही सबसे बड़ा धन है’। उन्होंने समाज को यह सशक्त संदेश दिया कि दहेज प्रथा समाज के लिए अभिशाप है। इसे समाप्त करने के लिए प्रत्येक परिवार को आगे आना चाहिए। इस प्रेरणादायी पहल की समारोह में उपस्थित समस्त क्षत्रिय समाज के मौतबीरों, नागरिकों एवं रिश्तेदारों ने प्रशंसा की। इसे समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

डेस्क/माय सर्कल न्यूज
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज

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