चित्तौड़गढ़। जिले में अवैध खनन की रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन का दावा है कि 15 जनवरी तक विशेष अभियान चलया जा रहा हैं लेकिन जमीन की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। चित्तौड़गढ़ जिले में अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन ने जंग छेड़ रखी है लेकिन गंगरार क्षेत्र की तस्वीरें प्रशासन के दावों की हवा निकाल रही हैं। कोजुन्दा, हिमतनगर और सादी समेत करीब एक दर्जन गांवों के लोग बुधवार को डर और गुस्से के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफियाओं ने उनका जीना मुहाल कर दिया है। अवैध खनन से हर दिन होने वाले तेज विस्फोटों से ग्रामीणों के घरों की दीवारों में दरारें आ रही हैं। लोगों को डर है कि कहीं सोते समय उनके आशियाने सिर पर न गिर जाएं। भारी मात्रा में उड़ती धूल ने न केवल हवा को जहरीला बना दिया है, बल्कि खेती और स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। अंधाधुंध खनन की वजह से कुओं और ट्यूबवेल का जलस्तर गिर गया है, जिससे भविष्य में सूखे का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि माफिया के ट्रक और ट्रैक्टर गांव की संकरी गलियों में इतनी तेज गति से दौड़ते हैं कि बच्चों और बुजुर्गों का सड़क पर निकलना भी दूभर हो गया है। गंगरार क्षेत्र के ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अगर 15 जनवरी तक चलने वाला यह विशेष अभियान इन माफियाओं पर नकेल नहीं कस पाया, तो यह केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगा।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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