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February 8, 2026 4:31 am

श्रम विभाग में 3 साल पुराने 3351 आवेदन रिओपन, जांच के लिए 4 टीमें गठित, डेथ क्लेम के 462 फॉर्म का होगा भौतिक सत्यापन

चित्तौड़गढ़, सलमान। श्रम विभाग में करोड़ों के फर्जीवाड़े की आशंका के बाद हड़कंप मच गया है। अपात्र लोगों को लाभ दिलाने और फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी खजाने को चूना लगाने की शिकायतों के बाद विभाग ने अब 3 साल पुराने लंबित आवेदनों की जांच के लिए पेंडोरा बॉक्स खोल दिया है। राजस्थान श्रम विभाग पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलाता है, जिनमें शुभशक्ति योजना, निर्माण श्रमिक शिक्षा व कौशल विकास योजना और प्रसूति सहायता योजना शामिल हैं। ये योजनाएं शिक्षा, आवास, स्वास्थ्य, औजार और दुर्घटना सहायता के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करती हैं।
चित्तौड़गढ़ जिले के श्रम विभाग में तीन साल से दबे पड़े 3351 आवेदनों में कमियों के चलते रिओपन किए गए हैं। इन आवेदनों में से कुछ में भ्रष्टाचार की शिकायतों और मुख्यमंत्री की जनसुनवाई में श्रमिकों की पीड़ा सामने आने के बाद विभाग ने सख्त कदम उठाया है। एसएनए पोर्टल पर भुगतान के लिए तैयार 3351 आवेदनों को फिर से री-ओपन कर दिया गया है। यानी अब इन सभी आवेदनों की नए सिरे से बारीकी से जांच होगी।
ये वो आवेदन थे जो भुगतान के लिए एसएनए पोर्टल से ट्रेजरी को जाना तो और एक क्लिक होते ही आवेदनकर्ताओं के खाते में भुगतान आना था लेकिन फर्जीवाड़े की कुछ शिकायतों ने इनका रास्ता रोक दिया। 3351 आवेदनों में से 462 आवेदन सामान्य और दुर्घटना में मृत्यु के हैं। इन 462 मृत्यु क्लेम का भौतिक सत्यापन के लिए चित्तौड़गढ़, उदयपुर और भीलवाड़ा के श्रम निरीक्षकों की 3 टीमें इनकी परतें खोलेंगी। 10 से 12 दिनों में ये टीमें भौतिक सत्यापन के लिए आवेदनकर्ताओं तक पहुंच छानबीन करेंगी। मामला सिर्फ कागजी खानापूर्ति का नहीं है। सूत्रों के मुताबिक मृत्यु क्लेम दिलाने के नाम पर दलाल मृतक के परिजनों से एक से डेढ़ लाख रुपये तक योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए वसूल लेते थे। विभाग के कुछ अधिकारियों से मिलीभगत कर बिना पूरे दस्तावेजों के ही इन फाइलों को भुगतान के लिए आगे बढ़ा दिया।

चित्तौड़गढ़ उप श्रम आयुक्त सुनील कुमार यादव ने बताया कि आवेदनों को रिओपन कर दिए हैं, फर्जीवाड़े करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि 3351 आवेदनों का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। 2889 आवेदन जो 50 हजार की सहायता तक के हैं उनकी जांच कार्यालय स्तर से की जा रही हैं। 10 से 12 दिन में रिपोर्ट आने के बाद पात्र लोगों को भुगतान होगा।

लेकिन, फर्जी दस्तावेज लगाने वालों और गलत तरीके से लाभ पहुंचाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा जाएगा। सूत्र बताते हें कि इस पूरे खेल में अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की एंट्री की भी संभावना बढ़ गई है। ये पूरा मामला एसीबी को भी गया हैं। ऐसे में राजकीय कोष को हानि पहुंचाने के आरोप में तत्कालीन अधिकारियों और दलालों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। विभाग के उप श्रम आयुक्त ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी दलाल को पैसे न दें। आवेदन केवल नजदीकी ई-मित्र से ही करवाएं। योजनाओं का लाभ दिलाने की एवज में पैसे मांगने वाले कॉल आने पर पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराएं।

डेस्क/माय सर्कल न्यूज
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज

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