जयपुर। राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में आज प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) को लेकर एक सनसनीखेज खुलासा हुआ। कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने सदन में स्वीकार किया कि प्रदेश में किसानों के हक पर डाका डालने वाला एक संगठित माफिया सक्रिय है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच SOG (Special Operations Group) से करवाने की बड़ी घोषणा की है। भाजपा विधायक बाबूसिंह राठौड़ द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया कि श्रीगंगानगर के श्रीकरणपुर क्षेत्र में बीमा कंपनियों और अधिकारियों की मिलीभगत का एक बड़ा खेल सामने आया है। जहां वास्तविक रूप से फसल का नुकसान 70% तक था, वहां कागजों में इसे 0% दिखाकर किसानों के क्लेम को खारिज कर दिया गया।
आरोप है कि बीमा कंपनी के सर्वेयर ने किसानों, कृषि पर्यवेक्षकों और राजस्व अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर स्वयं ही रिपोर्ट तैयार कर दी। इस हेरफेर के कारण लगभग 1.70 लाख आवेदन प्रभावित हुए और किसानों को मिलने वाला 128 करोड़ रुपए का बीमा क्लेम रुक गया। कृषि मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार किसानों के साथ अन्याय नहीं होने देगी। संगठित माफिया के नेटवर्क को ध्वस्त करने और संलिप्त अधिकारियों/सर्वेयरों की पहचान के लिए एसओजी जांच के आदेश दिए गए हैं।
संबंधित बीमा कंपनी को सरकार ने डिफॉल्टर माना है। भारत सरकार को पत्र लिखकर अनुरोध किया गया है कि इस कंपनी को भविष्य में कोई टेंडर न दिया जाए। इस मामले में एफआईआर दर्ज कर पुलिस जांच पहले ही शुरू कर दी गई है। मंत्री ने संकेत दिया कि यह फर्जीवाड़ा केवल एक जिले तक सीमित नहीं है। उन्होंने सालासर (चूरू) में भी फर्जी बैंक खातों के जरिए करोड़ों के क्लेम उठाने के प्रयास का जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि ऐसी कंपनियों को राजस्थान में काम नहीं करने दिया जाएगा जो किसानों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करती हैं। ब्याज के लालच में किसानों का पैसा रोकना बर्दाश्त नहीं होगा।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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