◆ कृषि में उर्वरक के लिए आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य एवं स्थानिय प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के लिए मील का पत्थर
चित्तौड़गढ़। हिन्दुस्तान जिंक द्वारा चित्तौडगढ़ में प्रस्तावित खाद कारखाना राजस्थान एवं उत्तर भारत का पहला फाॅस्फेट खाद का कारखाना होगा। राजस्थान और देश में खाद की भारी कमी को देखते हुए यह कारखाना लगाया जा रहा हैं। इस कारखाने के आने के बाद चित्तौड़गढ़ जिला एवं सम्पूर्ण राजस्थान में खाद की कमी को पूरा करने के साथ ही अन्य राज्यों में भी उर्वरक की उपलब्धता होगी। कृषि के लिए अनिवार्य उर्वरक फाॅस्फेट के लिये यह कारखाना प्रदेश और देश को आत्मनिर्भर बनाने में महती भूमिका निभाएगा।

आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य एवं स्थानिय प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के लिए मील का पत्थर साबित होगा। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की खाद की आवश्यकता एवं बिक्री लगभग 707.04 लाख मीट्रिक टन थी, जिसमें खरीफ के लिए 344.40 और रबी के लिए 362.63 लाख मीट्रिक टन शामिल था। इस अवधि में किसानों ने रिकॉर्ड उत्पादन और आयात 679.16 लाख टन उर्वरक की खरीद की। जो अनुमानित मांग से लगभग 1 प्रतिशत अधिक थी। यूरिया का उत्पादन 306.40 आयात 56.47 रहा जबकि बिक्री अनुमानित मांग 387.74 लाख मीट्रिक टन रही। डीएपी यानि डाई-अमोनियम फॉस्फेट की उत्पादन 37.69 आयात 45.69 कुल 83.38 लाख मीट्रिक टन रही। वित्त वर्ष 2024-25 में राजस्थान में यूरिया का उत्पादन लगभग 38.69 लाख मीट्रिक टन था, डीएपी का राजस्थान में कोई संयंत्र संचालित नही है जिससे उत्पादन नही है। संतुलित उपयोग की कमी एक बडी समस्या है, अक्सर किसान सरकार की सब्सिडी के कारण यूरिया का अधिक इस्तेमाल करते हैं और दूसरे जरूरी पोषक तत्वों, जैसे फॉस्फेट और पोटाश, का कम उपयोग करते हैं। इससे मिट्टी की सेहत खराब होती है। राजस्थान में उर्वरक की आवश्यकता रबी जिसमें गेहूं, सरसों और खरीफ बाजरा, मूंगफली की फसलों के लिए उर्वरक की भारी मांग रहती है। आयात पर निर्भरता से फाॅस्फेट और एमओपी के लिए आयात पर निर्भरता से आपूर्ति में मुश्किलें आ सकती हैं। भारत और राजस्थान दोनों में खाद की मांग लगातार बनी हुई है। आयात पर निर्भरता कम करना और संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं। खाद के लिए चित्तौडगढ़ में शुरू होने वाले प्लांट से राजस्थान एवं निकटवर्ती क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी । इस कारखाने की क्षमता दो चरणों में 10 लाख टन प्रतिवर्ष उत्पादन की रहेगी जिसमें डाई अमोनियम फाॅस्फेट, नाईट्रोजन फाॅस्फोरस पोटेशियम तथा अमोनियम फाॅस्फेट सल्फेट रहेगी। फाॅस्फेट उर्वरक के उत्पादन से सम्पूर्ण राजस्थान का किसान हर्षित होगा और उसकी पैदावार में बढ़त होगी। इस कारखाने के आने के बाद खाद की माॅंग एवं पूर्ति में संतुलन आएगा। राजस्थान देश में फर्टिलाइजर उर्वरक के मामलें में स्वावलंबी होगा। इस कारखाने को बनाने में पहले चरण में 2700 करोड़ रूपए से अधिक का निवेश किया जा रहा है। यह कारखाना अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित है जिसमें पर्यावरण सरंक्षण का विशेष ध्यान रखा जाएगा। वर्तमान कारखाने में उत्पादित सल्फ्युरिक एसिड का उपयोग कच्चे माल के रूप में होगा । लगभग 111 करोड़ रूपए सुरक्षा एवं पर्यावरण क्षेत्र में उच्च औद्योगिक माानक हेतु खर्च किये जाएंगे। कारखाने के निकटवर्ती क्षेत्रों के निवासियों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष लाभ होगा। कारखाना निर्माण के दौरान एवं बनने के बाद लगभग 5 हजार व्यक्तियों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। आर्थिक एवं सामाजिक रूप से निकटवर्ती क्षेत्र के निवासियों के जीवन स्तर में व्यापक परिवर्तन देखने को मिलेगा। अप्रत्यक्ष रूप से मकान किराया, भूमि किराया, व्यापार में वृद्धि किराणा, सब्जी, ढाबे, होटल, यातायात-टेम्पो एवं टेक्सी, ट्रक कपड़ा व्यवसाय सिलाई, विद्यालय जैसे कई क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा ।
राजस्थान सरकार एवं केन्द्र सरकार को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों एवं राजस्व के माध्यम से लाभ होगा। अच्छी किस्म का उर्वरक किसानों को मिलने से उन्हें उपज का मंडी से अच्छा मुनाफा होगा ।
निकटवर्ती क्षेत्रों में सीएसआर के अन्तर्गत आधारभूत ढाॅंचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि एवं पशुधन, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण सरंक्षण, सुरक्षा एवं स्वावलम्बी बनाने के लिए चलायी जा रही योजनाओं के साथ ही अन्य योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव आएगा। युवा शक्ति को कौशल प्रशिक्षण से रोजगार में लाभ मिलेगा। चित्तौड़गढ़ जिला राजस्थान एवं भारत के मानचित्र पर अपनी अमिट छाप छोड़ेगा ।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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