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March 11, 2026 6:04 pm

नदी, सड़का, मगरा और माटी रो, अब तो मांगो थे सम्मान..!

बनास री छाती चीर दी, मगरा कर दिया सून, सफेद भाटां रै लालच में, पीग्या धरती रो खून। मोटा-मोटा खाडा कर दिया, सड़का पर वेगया मोटा खाडा, वाने भरवा रो टेम कोनी, बोटां री जद आवे आंधी, हाथ लम्बा जुड़ जावे, गांवां-गांवां सड़क बणसी, विकास री नदी बहेगी, रोजगार, सड़का और पानी री आफत मिटा देस्यां, चुनाव लड़ता वगत मायने ओ लारलो यो वादो हो, सतरंज बिछाई है गजब री, मोहरा बणिया भोळा मनख, दूसरी पार्टी रा डमी खड़ा कर, रच्यो अनोखो जोग। दो ने आपस में भिड़ाय’र, तीजो बाजी मार जावे, जनता निहारती रेवे मूंढो, और ‘था’ कुर्सी पे मुस्करावे। कपासन रे कई गांवां री सालां सू टूटी रोड़ां, जद भ्रष्टाचार री बलि चढ़ जावें। रेत री काली कमाई, बनास रो काळजो खा गई,
विकास री कोरी बातां, गांवां री आबरू उड़ा गई। कुण देखे और कुण हुणे? नदी, मगरा, माटी खोदी, कुदरत रो किदो अपमान, अब तो जागो ओ जनता, झूठा वादां ने पहचान। अब हाथ जोड़ियां कांई होवे, अब तो मांगो कड़ो हिसाब। नदी, सड़का, मगरा और माटी रो, अब तो मांगो थे सम्मान..!

डेस्क/माय सर्कल न्यूज
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज

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