चित्तौड़गढ़। भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मोड़ आ गया है। अब तक केवल सरकारी एकाधिकार एनपीसीआईएल वाले परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूहों में से एक, अडाणी समूह ने औपचारिक रूप से कदम रख दिया है। अडाणी समूह ने रावतभाटा राज एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड के नाम से अपनी नई कंपनी को अस्तित्व में लाकर इस क्षेत्र में निजीकरण की नींव रख दी है। प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अडाणी पावर ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी अडाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड (AAEL) के माध्यम से 20 अप्रैल 2026 को नई इकाई रावतभाटा राज एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड (RRAEL) का पंजीकरण कराया है। इस कंपनी का मुख्य उद्देश्य परमाणु स्रोतों से बिजली का उत्पादन, ग्रिड ट्रांसमिशन और वितरण करना होगा। इस बड़े बदलाव के पीछे केंद्र सरकार द्वारा दिसंबर 2025 में पारित किया गया शांति कानून है। इस कानून ने 1962 के परमाणु ऊर्जा अधिनियम में संशोधन कर निजी क्षेत्र के लिए दरवाजे खोले। पुराने न्यूक्लियर लायबिलिटी बिल की कड़ी शर्तों को संशोधित कर अब सिस्टम की खराबी या दुर्घटना की स्थिति में ऑपरेटरों के लिए मुआवजे के नियमों को अधिक व्यावहारिक बनाया गया है।रावतभाटा में वर्तमान में 8 परमाणु रिएक्टर स्थापित हैं। सूत्रों के अनुसार, अडाणी समूह की योजना यहाँ मौजूदा बुनियादी ढांचे का लाभ उठाने की है। कयास लगाए जा रहे हैं कि भविष्य में यूनिट 3 से 6 के बीच किसी एक रिएक्टर के परिचालन या विस्तार की कमान निजी हाथों में सौंपी जा सकती है। हालांकि कंपनी ने अभी तक निवेश की कुल राशि या प्रोजेक्ट की समय-सीमा का खुलासा नहीं किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश हजारों करोड़ रुपये का होगा। अडाणी के अलावा टाटा समूह और रिलायंस इंडस्ट्रीज भी इस क्षेत्र में अपनी संभावनाएं तलाश रहे हैं।
Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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