


नई दिल्ली। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में पैर पसार चुके अवैध बालू खनन और उससे जलीय जीवों के अस्तित्व पर मंडराते खतरे पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान तीनों राज्य सरकारों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने साफ कहा है कि अवैध उत्खनन को बढ़ावा देने वाले तत्वों के खिलाफ एहतियाती हिरासत जैसी सख्त कार्रवाइयां अमल में लाई जाएं, ताकि ऐसे मामलों में समाज के सामने एक नजीर पेश की जा सके।
सुनवाई के दौरान अदालत का रुख बेहद कड़ा और सख्त नजर आया। जब पीठ को सूचित किया गया कि अकेले मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में ही अवैध खनन में सहभागिता करने वाले 551 लोगों को चिन्हित किया जा चुका है, तो शीर्ष अदालत ने राज्य प्रशासन पर तीखे सवाल उठाए। केवल चालकों के बजाय मालिकों, वित्तपोषकों और संरक्षकों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज करने के निर्देश हैं।
पीठ ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि पहचान हो जाने के बावजूद इन लोगों को अब तक हिरासत में क्यों नहीं लिया गया? अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की कि प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वालों के साथ किसी भी तरह की सहानुभूति नहीं दिखाई जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियां:
कोई नरमी नहीं-पर्यावरण और कुदरत को नुकसान पहुंचाने वालों के साथ कोई सहानुभूति नहीं होगी।
प्रकृति की क्षमता-यदि मानवीय हस्तक्षेप पर अंकुश लग जाए, तो प्रकृति स्वयं अपना संतुलन बहाल करने में सक्षम है।
सख्त आदेश-अवैध खनन माफियाओं को एहतियाती हिरासत में लेकर नजीर कायम करें तीनों राज्य।
मामले की सुनवाई के दौरान तीनों संबंधित राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश ने अब तक दर्ज प्राथमिकियों, गाड़ियों की ज़ब्ती और की गई प्रशासनिक कार्रवाइयों का लेखा-जोखा अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। हालांकि, पीठ इन दलीलों से संतुष्ट नजर नहीं आई।

अदालत ने स्पष्ट किया कि चंबल और उसकी सहायक नदियों की संवेदनशील पारिस्थितिकी को बचाने के लिए सिर्फ कागजी कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि धरातल पर और अधिक प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। चंबल नदी दुर्लभ घड़ियालों, मगरमच्छों और गांगेय डॉल्फिन का मुख्य प्राकृतिक आवास है, जिस पर अवैध खनन का सीधा प्रहार हो रहा है। शीर्ष अदालत ने इस बेहद महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को तय की है। अब देखना यह होगा कि 4 अगस्त की तारीख से पहले तीनों राज्यों का पुलिस प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए खनन माफियाओं पर कितनी कड़ी और मिसाली कार्रवाई करता है।

Author: डेस्क/माय सर्कल न्यूज
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